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Hindu Dharma: घर से इन 5 लोगों का खाली हाथ लौटना है बड़ा अपशकुन, खुशहाली और बरकत पर होता है असर

Hindu Dharma: हिन्दू धर्म में 5 तरह के लोगों का घर से खाली हाथ लौटना बड़ा अपशकुन माना जाता है. आइए जानते हैं, कौन हैं ये 5 लोग और उनके बिना बरकत, खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा पर क्यों पड़ता है नकारात्मक असर?

Hindu Dharma: हिन्दू धर्म और परंपराओं में दान, सम्मान और करुणा को विशेष महत्व दिया गया है. बुजुर्गों की मान्यता है कि कुछ खास लोग यदि घर से खाली हाथ लौट जाएं, तो इसका प्रभाव घर की खुशहाली, बरकत और सकारात्मक ऊर्जा पर पड़ता है. ये नियम केवल आस्था से नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन और मानवीय संवेदना से भी जुड़े माने जाते हैं. आइए जानते हैं, किन 5 लोगों का खाली हाथ जाना बड़ा अपशकुन माना जाता है और खुशहाली और बरकत पर नेगेटिव असर होता है?

किन्नर को न लौटाएं खाली हाथ

किन्नर समाज को परंपरा में विशेष स्थान प्राप्त है. खुशी के अवसरों पर उनका आशीर्वाद शुभ माना जाता है. यदि वे आपके द्वार तक आएं, तो उन्हें कुछ न कुछ अवश्य देना चाहिए. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

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शादीशुदा बेटी को दें उपहार

बेटी जब मायके से विदा हो, तो उसे खाली हाथ भेजना अशुभ माना जाता है. यह केवल उपहार का विषय नहीं, बल्कि भावनात्मक सुरक्षा और अपनत्व का प्रतीक है. इससे पारिवारिक संबंध मजबूत बने रहते हैं.

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जरूरतमंद की मदद सबसे पहले

गरीब या भिखारी जब सहायता के लिए आए, तो उसे अनदेखा करना उचित नहीं माना जाता. धन न हो तो भोजन या अन्न दिया जा सकता है. ऐसी सहायता को पुण्य से जोड़ा गया है और इससे घर में बरकत बनी रहती है.

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साधु-संत का सत्कार

धार्मिक जीवन जीने वाले साधु या संत जब घर आएं, तो उनका आदर करना परंपरा का हिस्सा है. फल, भोजन या दक्षिणा देना शुभ माना जाता है. उनका आशीर्वाद मानसिक शांति से जुड़ा होता है.

ब्राह्मण और पुजारी को भोजन

धार्मिक कार्य या पूजा के समय ब्राह्मण या पुजारी को भोजन कराना शुभ संकेत माना गया है. इससे घर का वातावरण शांत और सकारात्मक रहता है. अतिथि को देवता समान मानने की परंपरा इसी भावना से जुड़ी है.

जानें परंपरा के पीछे की सोच

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दान और सम्मान से अहंकार कम होता है. इससे समाज में संतुलन बना रहता है. जरूरतमंद की सहायता करना केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि मानवीय जिम्मेदारी भी है.

ये नियम आज भी हैं प्रासंगिक

ज्योतिषाचार्य हर्षवर्द्धन शांडिल्य बताते हैं कि आधुनिक जीवन में इन परंपराओं को अंधविश्वास नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता के रूप में देखा जा सकता है. छोटी सहायता भी किसी के जीवन में बड़ा सहारा बन सकती है. ये मान्यताएं पीढ़ियों से चली आ रही हैं और आज भी जीवन में सकारात्मक दिशा देने का कार्य करती हैं.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है।News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।


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