Hanuman Jayanti 2026 Date: हिंदू धर्म में संकटमोचन हनुमान जी की भक्ति का बहुत खास स्थान है. माना जाता है कि कलयुग में हनुमान जी ही ऐसे देवता हैं जो सशरीर धरती पर उपस्थित हैं. हर साल चैत्र मास की पूर्णिमा को हनुमान जयंती (हनुमान जन्मोत्सव) बड़े हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई जाती है. आइए जानते हैं, साल 2026 में हनुमान जयंती कब है, इसकी सही तिथि क्या है, इस पर्व का महत्व और पूजा की सरल विधि क्या है?
हनुमान जयंती 2026 कब है?
साल 2026 में हनुमान जयंती 1 अप्रैल, बुधवार को मनाई जाएगी. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा की तिथि इस प्रकार है:
पूर्णिमा तिथि शुरू: 31 मार्च 2026 की रात
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 1 अप्रैल 2026 की देर रात तक
पूजा का सबसे शुभ समय उदयातिथि माना जाता है, इसलिए पूरे देश में हनुमान जन्मोत्सव 1 अप्रैल को ही मनाया जाएगा. इस बार बुधवार का दिन होने के कारण हनुमान जी की आराधना और भी अधिक फलदायी मानी जा रही है.
हनुमान जयंती का धार्मिक महत्व
हनुमान जयंती केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि शक्ति, साहस और अटूट भक्ति का प्रतीक है. शास्त्रों के अनुसार, हनुमान जी का जन्म माता अंजना और पिता केसरी के घर हुआ था. उन्हें भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार के रूप में माना जाता है. इस दिन की महत्ता को इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:
दुखों का नाश: विधि-विधान से पूजा करने पर शनि दोष और साढ़े साती के प्रभाव से मुक्ति मिलती है.
सकारात्मक ऊर्जा: हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ घर में नकारात्मक शक्तियों को दूर करता है.
मनोकामना पूर्ति: श्रद्धा और भक्ति से की गई प्रार्थना भक्तों को बल, बुद्धि और सफलता प्रदान करती है.
हनुमान जयंती की सरल पूजा विधि
बजरंगबली को सरल और शुद्ध भक्ति अत्यंत प्रिय है. 1 अप्रैल 2026 को निम्न विधि अपनाई जा सकती है:
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ लाल या पीले वस्त्र पहनें.
संकल्प: हाथ में जल लेकर हनुमान जी के व्रत और पूजा का संकल्प लें.
चौकी की स्थापना: लाल कपड़ा बिछाकर हनुमान जी और श्री राम-सीता की मूर्ति रखें.
चोला अर्पण: सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं. यह हनुमान जी को विशेष प्रिय है.
भोग: मोतीचूर लड्डू, बूंदी या शुद्ध घी से बना हलवा अर्पित करें. भोग में तुलसी के पत्ते शामिल करना न भूलें.
पाठ: हनुमान चालीसा, सुंदरकांड या बजरंग बाण का पाठ करें.
आरती: अंत में कपूर जलाकर आरती करें और ‘आरती कीजे हनुमान लला की’ का गान करें.
बनारसी पान चढ़ाएं: यदि आप कर्ज या कानूनी परेशानियों से जूझ रहे हैं, तो इस दिन हनुमान जी को बनारसी पान चढ़ाना शुभ माना जाता है.
क्या करें और क्या न करें
हनुमान जी की पूजा में शुद्धता और सात्विकता का ध्यान रखना आवश्यक है:
ब्रह्मचर्य: व्रत रखने वाले पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें.
सात्विकता: प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का त्याग करें.
क्रोध न करें: शांत मन से सेवा करें और किसी का अपमान न करें.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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