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Choti Diwali 2025: आज है छोटी दिवाली, जानें नरक चतुर्दशी की पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, मंत्र और आरती

Choti Diwali 2025 Shubh Muhurat & Puja Vidhi: धनतेरस के बाद आज यानी 19 अक्टूबर 2025, वार रविवार को छोटी दिवाली का पर्व मनाया जा रहा है, जिसे काली चौदस और नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जात है. चलिए जानते हैं छोटी दिवाली के महत्व, पूजा के शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, मंत्र और आरती आदि के बारे में.

Credit- News24 Graphics

Choti Diwali 2025 Shubh Muhurat & Puja Vidhi: दिवाली के 5 दिवसीय पर्व का आरंभ धनतेरस से हो गया है, जिसका समापन भाई दूज के दिन होगा. बीते दिनों 18 अक्टूबर 2025 को देशभर में धनतेरस का पर्व मनाया गया, जिसके बाद अब 20 अक्टूबर को दिवाली मनाई जाएगी. हालांकि, हर साल दिवाली से एक दिन पहले यानी कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को छोटी दिवाली का पर्व मनाया जाता है, जो इस बार आज यानी 19 अक्टूबर 2025, वार रविवार को है. देश के कई राज्यों में छोटी दिवाली को काली चौदस, नरक चतुर्दशी, भूत चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन भगवान गणेश और मां लक्ष्मी के साथ हनुमान जी की पूजा की जाती है, जबकि शाम में मृत्यु के देवता यमराज की पूजा करके उनके नाम का दीपक जलाया जाता है.

धार्मिक मान्यता के अनुसार, छोटी दिवाली के दिन यम का दीपक जलाने से अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है और घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. चलिए अब जानते हैं छोटी दिवाली की पूजा के शुभ मुहूर्त, विधि, मंत्र और आरती आदि के बारे में विस्तार से.

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छोटी दिवाली की चतुर्दशी तिथि

  • शुरू- 19 अक्टूबर को दोपहर 1:53 मिनट पर
  • समाप्त- 20 अक्टूबर को दोपहर 3:46 मिनट पर

छोटी दिवाली की पूजा का मुहूर्त

  • अभ्यंग स्नान का मुहूर्त- सुबह 5:12 से सुबह 6:25
  • यम दीप मुहूर्त- दोपहर 12 से सुबह 12:50
  • लक्ष्मी-गणेश पूजा मुहूर्त- शाम 5:47 से रात 9 बजे
  • काली चौदस मुहूर्त- रात 11:47 से सुबह 12:37
  • हनुमान पूजा मुहूर्त- रात 11:47 से सुबह 12:37

छोटी दिवाली की पूजा विधि

  • सुबह जल्दी अभ्यंग स्नान करें.
  • घर और मंदिर में गंगाजल का छिड़काव करें.
  • सूर्य देव को अर्घ्य दें.
  • पूजा स्थल पर भगवान गणेश, लक्ष्मी जी और हनुमान जी की मूर्ति या चित्र की स्थापना कर पूजा करें.
  • देवी-देवताओं को फल, फूल, रोली, अक्षत और मिठाई आदि अर्पित करें.
  • शाम को घर की चौखट पर और बाहर यमराज के निमित्त तेल का दीपक जलाएं, जबकि देवी-देवता के सामने 12 दीपक जलाएं. दरअसल, छोटी दिवाली पर कुल 14 दीपक जलाए जाते हैं, जिनमें यम देवता का दीपक भी शामिल होता है.
  • दिन खत्म होने से पहले दान जरूर करें.

छोटी दिवाली पर इन मंत्रों के जाप से होगा लाभ

  • अभ्यंग स्नान- अभ्यंगं कुर्वे प्रात: नरकप्राप्तये सदा। दामोदरप्रीतये च स्नानं में भवतु सिद्धिदम्।।
  • गणेश जी- ॐ गं गणपतये नमः
  • लक्ष्मी जी- ॐ महालक्ष्म्यै नमः
  • हनुमान जी- ॐ हं हनुमते नमः
  • यम दीपदान- मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह। त्रयोदशी दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम।।

छोटी दिवाली पर जरूर करें लक्ष्मी-गणेश जी की आरती

  • गणेश जी-

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

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एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

भगवान गणेश की जय, पार्वती के लल्ला की जय….

  • लक्ष्मी जी-

ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।

तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।

मैया तुम ही जग-माता।।

सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।

मैया सुख सम्पत्ति दाता॥

जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।

मैया तुम ही शुभदाता॥

कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।

मैया सब सद्गुण आता॥

सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।

मैया वस्त्र न कोई पाता॥

खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।

मैया क्षीरोदधि-जाता॥

रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।

मैया जो कोई जन गाता॥

उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।

तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। ऊं जय लक्ष्मी माता।।

दोहा

महालक्ष्मी नमस्तुभ्यम्, नमस्तुभ्यम् सुरेश्वरि।

हरिप्रिये नमस्तुभ्यम्, नमस्तुभ्यम् दयानिधे।।

पद्मालये नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं च सर्वदे।

सर्व भूत हितार्थाय, वसु सृष्टिं सदा कुरुं।।

सब बोलो लक्ष्मी माता की जय, लक्ष्मी नारायण की जय।।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.


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