Ayodhya Dhwaj Sthapana: अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण कार्य पूरी तरह से पूरा हो गया है, जिसे देशभर के करोड़ों लोग वर्षों से देखना चाहते थे. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने घोषणा की है कि मुख्य मंदिर और उसके परिसर में 6 छोटे मंदिरों का निर्माण भी पूरा हो चुका है. ट्रस्ट 23 से 25 नवंबर तक तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित करेगा, जिसमें 25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिखर पर ध्वज फहराएंगे और मंदिर को औपचारिक रूप से पूर्ण घोषित किया जाएगा.
ट्रस्ट के अनुसार, मुख्य मंदिर के साथ-साथ शिव, गणेश, हनुमान, सूर्य, भगवती, अन्नपूर्णा और शेषावतार को समर्पित छह छोटे मंदिर भी बन चुके हैं. परिसर में ध्वज (झंडे) के खंभे, कलश, सप्त मंडप और ‘जटायु’ व ‘गिलहरी’ की मूर्तियों की स्थापना की जा चुकी है. अतिथियों और आगंतुकों के लिए सभी सुविधाएं भी पूरी की गई हैं. आपको बता दें, यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह दशकों तक भारत की राजनीति, समाज और सामूहिक चेतना में एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक भी है.
ये हैं अयोध्या में ध्वज स्थापना दिवस की तैयारियां
अयोध्या में राम मंदिर में ध्वज स्थापना दिवस की तैयारियां पूरी तेजी से चल रही हैं, जो ‘समरसता’ थीम पर आधारित है. मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र के अनुसार, ध्वज फहराने के लिए सेना की मदद ली जाएगी क्योंकि ध्वज का आकार और वजन असाधारण है. सेना ने मौके पर निरीक्षण कर रिहर्सल शुरू कर दिया है.
मिश्र ने बताया कि ध्वज स्थापना दिवस के दिन अनुष्ठान में भाग लेने के लिए लगभग 6,000 मेहमान आमंत्रित किए गए हैं और 2022 के बाद मंदिर निर्माण में दान देने वालों को भी बुलाने पर विचार किया जा रहा है. चंपत राय के अनुसार, यह समारोह केवल बड़े दानदाताओं या राजनीतिक हस्तियों तक सीमित नहीं होगा, बल्कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी दिखाएगा. ट्रस्ट चाहता है कि यह आयोजन धार्मिक उत्सव के साथ-साथ सामाजिक एकता का प्रतीक भी बने.
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प्राण प्रतिष्ठा से कैसे अलग है ध्वज स्थापना अनुष्ठान
अयोध्या में रामलला मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को संपन्न हुई थी. यह कार्यक्रम श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र द्वारा आयोजित किया गया और इसमें भगवान राम के बाल स्वरूप, रामलला, की प्रतिष्ठा की गई. इस अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष अनुष्ठान और मंत्रोच्चार के साथ मूर्ति को में प्राण की प्रतिष्ठा कर इसे जीवंत और पवित्र किया गया था.
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार प्राण प्रतिष्ठा का अर्थ है ‘जीवन शक्ति की स्थापना’. इस प्रक्रिया में मूर्ति को मंत्रोच्चार और पवित्र अनुष्ठानों के माध्यम से जीवित देवता के रूप में स्थापित किया जाता है. इसका उद्देश्य मूर्ति में देवता की दिव्यता और शक्ति को आमंत्रित करना होता है, ताकि वह भक्तों की पूजा स्वीकार कर सके और उन्हें आशीर्वाद दे सके. आपको बता दें कि प्राण प्रतिष्ठा के बिना किसी मूर्ति को पूजा योग्य नहीं माना जाता.
वहीं, मंदिर में ध्वज स्थापना अनुष्ठान भी महत्वपूर्ण है. यह प्रक्रिया मंदिर के शिखर पर ध्वज स्थापित करने की होती है. ध्वज स्थापना अनुष्ठान मंदिर निर्माण की पूर्णता का प्रतीक मानी जाती है. इस अवसर पर देवता का पूजन, ध्वज का विशेष पूजन और शुभ मुहूर्त में ध्वजारोहण किया जाता है.
हिन्दू धर्म की मान्यता है कि ध्वजारोहण से मंदिर में दैवीय ऊर्जा और पवित्रता का संचार होता है. भक्त इसे आस्था और विजय का प्रतीक मानते हैं. ऐसा माना जाता है कि मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराने से आसपास का वातावरण भी पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है. यह आयोजन भक्तों की अटूट आस्था और समर्पण को दर्शाता है.
ऐसा है अयोध्या राम मंदिर का ध्वज
अयोध्या राम मंदिर पर फहराने वाली ध्वजा अपने आप में विशेष होगी. इसे रामराज्य की परिकल्पना का प्रतीक माना जाता है. इस ध्वज पर राम राज्य के राजकीय चिह्न कोविदार वृक्ष, सूर्यवंश का प्रतीक भगवान सूर्य और समन्वय का प्रतीक ओंकार अंकित किया जाएगा. इसका रंग भगवा होगा. आपको बता दें कि कोविदार को आम भाषा में कचनार भी कहते हैं.
यह ध्वज 22 फीट लंबा और 11 फीट चौड़ा है. इसे पैराशूट फैब्रिक से बनाया गया है और फहराने के लिए नायलॉन और रेशम मिश्रित मोटी रस्सी का प्रयोग किया जाएगा. इसे विशेष मौसम की परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार किया गया है. ध्वज दंड कांस्य धातु का बना है और इसका वजन 5,500 किलो है. इसमें एक चक्र भी है, जिससे यह 360 डिग्री घूम सके और हवा की दिशा को दिखा सके.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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