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छोटे बच्चे को कार्टून नहीं बल्कि फोन पर दिखाएं यह चीज, साइकोलॉजिस्ट ने कहा बढ़ेगी सोशल लर्निंग

Baby Screen Time: एक-डेढ़ साल के बच्चे को भी पैरेंट्स अलग-अलग तरह के शोज दिखाने लगते हैं. लेकिन, थेरैपिस्ट का कहना है कि टीवी पर शो नहीं बल्कि यह चीज दिखाना है बच्चे के लिए बेस्ट.

बच्चों के लिए अच्छा स्क्रीन टाइम क्या है? Image Credit - Freepik

Parenting: बच्चों के हाथ में फोन देना अब आम हो गया है. छोटे बच्चों को एक बार फोन दिखा दिया जाए तो उन्हें इसकी लत लगते हुए भी देर नहीं लगती हैं. बच्चे सोते-जागते और खासकर खाना खाते हुए फोन या टीवी देखने की जिद करने लगते हैं. पैरेंट्स खासतौर से बच्चे को टीवी पर अलग-अलग तरह के कार्टून दिखाने लगते हैं. माता-पिता को लगता है कि कार्टून दिखाने पर कोई नुकसान नहीं है क्योंकि इससे बच्चे की सोशल लर्निंग (Social Learning) बढ़ती है. लेकिन, साइकोलॉजिस्ट और चाइल्ड बिहेवियर थेरैपिस्ट डॉ. विपुल विट्ठल यह नहीं मानते हैं. डॉ. विपुल की सलाह है कि बच्चे को टीवी या फोन पर कार्टून नहीं बल्कि ऐसी चीज दिखानी चाहिए जिससे बच्चे की लर्निंग बढ़ती है. जानिए साइकोलॉजिस्ट किस चीज की बात कर रहे हैं.

स्क्रीन टाइम में बच्चे को क्या दिखाएं

साइकोलॉजिस्ट का कहना है कि बच्चा छोटा हो तो उसका स्क्रीन टाइम (Screen Time) जीरो ही रखना चाहिए, लेकिन अगर फिर भी अगर बच्चे का मन बहलाने के लिए या उसका मनोरंजन करने के लिए आप उसे कुछ दिखाना ही चाहते हैं तो बच्चे को कार्टून ना दिखाएं. कार्टून या टीवी पर कोई शो दिखाने से बेहतर बच्चे को उसकी अपनी ही फोटो और वीडियो दिखाई जा सकती है. बच्चे को उसके पार्क में खेलने की, स्कूल की, उसके थेरैपी सेंटर या दोस्तों के साथ मस्ती की वीडियोज बच्चे को दिखाएं.

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बच्चे को उसकी खुद की वीडियो दिखाना ज्यादा बेहतर है बजाय उन वीडियो या शोज के जो उन्होंने खुद कभी लाइव देखा नहीं है और ना ही देख सकेंगे. बच्चे को वो चीजें दिखाएं जो उसने फील की हों और जो उसने खुद जी हों. रही बात बच्चे की लर्निंग की तो सोशल लर्निंग टीवी या फोन से नहीं आएगी बल्कि साइकोलॉजिस्ट का कहना है कि बच्चे की सोशल लर्निंग लोगों से मिलने पर और बाहर निकलने पर ही आएगी. स्क्रीन टाइम से बच्चे की सोशल लर्निंग नहीं आएगी.

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बच्चे पर स्क्रीन टाइम क्या नुकसान होते हैं

आंखों की समस्या - ज्यादा स्क्रीन टाइम से बच्चे की आंखों पर तनाव पड़ता है. इससे बच्चों में निकट दृष्टि दोष हो सकता है.

मोटापा - बिना एक्टिविटी के हर समय फोन या टीवी के सामने बैठे रहने से बच्चों में शारीरिक इनएक्टिविटी बढ़ती है जिससे मोटापा हो सकता है.

अटेंशन स्पैन कम होता है - बच्चे छोटी उम्र से ही स्क्रीन पर स्क्रोल करना सीख जाते हैं जिससे उनका अंटेशन स्पैन कम होने लगता है और उन्हें ध्यानकेंद्रिक करने में मुश्किल होती है.

सीखने की क्षमता घटती है - ज्यादा स्क्रीन टाइम वाले बच्चों में सीखने की क्षमता कम देखी गई है. खासतौर से कक्षा में बच्चों का मन नहीं लगता है.

चिड़चिड़े हो जाते हैं बच्चे - स्क्रीन टाइम ज्यादा होने के चलते बच्चों में चिड़िचड़ापन और भावानत्मक विकास में कमी देखी जाती है. बच्चों में मूड स्विंग्स भी ज्यादा होते हैं.


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