भारत केवल एक देश नहीं, बल्कि हजारों साल पुरानी आस्था, संस्कृति और इतिहास की जीवित किताब है. यहां मंदिर सिर्फ पूजा स्थल नहीं, बल्कि समय की गवाही देने वाली धरोहरें हैं. उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक फैले प्राचीन मंदिरें अपनी धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ अद्भुत वास्तुकला और ऐतिहासिक घटनाओं के लिए भी जानी जाती हैं. अगर आप यात्रा के शौकीन हैं और एतिहासिक मंदिरों के दर्शन करना चाहते हैं, तो हम आपको भारत के 5 सबसे प्राचीन मंदिरों के बारे में बताएंगे. आइए जानते हैं.
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काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे प्रमुख माना जाता है. इसका उल्लेख महाभारत और उपनिषदों में भी मिलता है. माना जाता है कि यह मंदिर अनादिकाल से काशी में है. इतिहास में कई बार इस मंदिर का जीर्णोद्धार और पुनर्निर्माण हुआ. यहां हर रोज बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए आते हैं.
सूर्यनार कोविल, तमिलनाडु
तमिलनाडु के कुंभकोणम के पास स्थित सूर्यनार कोविल सूर्य देव को समर्पित एक प्राचीन और खास मंदिर है. यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां सभी ग्रह देवताओं के लिए अलग मंदिर हैं. अभिलेखों के अनुसार इसका निर्माण चोल राजा कुलोत्तुंग चोल ने करवाया था. मंदिर की द्रविड़ शैली की वास्तुकला इसे दक्षिण भारत के सबसे सुंदर ऐतिहासिक मंदिरों में शामिल करती है.
केदारनाथ मंदिर, उत्तराखंड
उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में स्थित केदारनाथ मंदिर है, जिसका निर्माण 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा करवाया गया था. मान्यता है कि पांडवों ने यहां भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की थी. मंदिर की सीढ़ियों पर पाली या ब्राह्मी लिपि में खुदे अक्षर आज भी इसके प्राचीन इतिहास की झलक देते हैं.
बृहदेश्वर मंदिर, तमिलनाडु
तमिलनाडु के तंजौर जिले में स्थित बृहदेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है. इसका निर्माण 1002 ईस्वी में चोल शासक राजा राज चोल प्रथम ने करवाया था. द्रविड़ शैली में बना यह मंदिर अपनी 66 मीटर ऊंची संरचना के लिए मशहूर है. अपने समय में इसे विश्व की सबसे विशाल इमारतों में गिना जाता था और आज भी यह स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है.
जगन्नाथ मंदिर, पुरी
ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर भगवान विष्णु के अवतार को समर्पित है. माना जाता है कि 12वीं शताब्दी में गंग वंश के राजा अनंतवर्मन चोडगंग ने इसका निर्माण कराया था. मान्यता है कि राजा को सपने में भगवान जगन्नाथ के दर्शन हुए थे और उन्होंने गुफा में मूर्ति स्थापित करने का आदेश दिया था. यहां होने वाली वार्षिक रथ यात्रा दुनियाभर में मशहूर है.
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