उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में लगे माघ मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. साधु-संत और कल्पवासी तरह-तरह की कठोर साधनाएं कर रहे है. माघ मेले में एक कल्पवासी ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. उनका कहना है कि उन्होंने पिछले 20 सालों से अन्न का एक दाना तक नहीं खाया है. यूपी के रायबरेली के रहने वाले रंजीत सिंह ने कहा कि 2006 से उन्होंने अन्न पूरी तरह त्याग दिया और तभी से सिर्फ फल खाकर जी रहे हैं.
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सेना से रिटायर होने के बाद लिया प्रण
60 साल के रंजीत सिंह भारतीय सेना से रिटायर्ड हैं. रंजीत सिंह ने बताया कि 2005 में सेना से रिटायर होने के बाद 10 जुलाई 2006 को उन्होंने पूरी तरह से अन्न खाना छोड़ दिया. उन्होंने कहा कि मठ मंदिरों में वो संतों से मिले, इस दौरान एक महात्मा ने उन्हें बताया कि फलाहार संतों के लिए है, कोई गृहस्थ इसे नहीं कर सकता. रंजीत सिंह ने बताया कि उसी पल उन्होंने हनुमान जी का नाम लेते हुए ये ठान ली कि वो सिर्फ फलाहार पर अपना जीवन यापन करेंगे.
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60 साल की उम्र में भी फिट
रंजीत सिंह ने बताया कि शुरुआत में उन्होंने एक प्रयोग के तौर पर अन्न खाना छोड़ा था, लेकिन उसके बाद उन्हें ऐसे फायदे हुए कि फलाहार उनके जीवन का हिस्सा बन गया. रंजीत सिंह ने कहा कि 60 साल की उम्र में भी उन्हें किसी तरह की कमजोरी फील नहीं होती, ना ही उन्हें कोई बीमारी है. आर्मी से रिटायर होने के बाद वो जॉब भी कर रहे हैं और घर की जिम्मेदारी भी उठा रहे हैं. रंजीत सिंह का कहना है कि ज्यादा अनाज खाने से बीमारियां बढ़ती हैं.
दिनचर्या में अनुशासन बेहद जरूरी
रंजीत सिंह अपने जीवन में अनुशासन फॉलो करते हैं. माघ मेले में भी वो ब्रह्म मुहूर्त में जागते हैं, संगम में डुबकी लगाते हैं, मेडिटेशन और एक्सरसाइज करते हैं. दोपहर के वक्त वो फल, नारियल, मूंगफली, किशमिश और बादाम जैसी हेल्दी चीजें खाते हैं. उनका कहना है कि ऐसा भोजन खाने से शरीर स्वस्थ रहता है और दिमाग भी शांत रहता है
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