16 जनवरी को मिर्ज़ापुर से शुरू हुई आम आदमी पार्टी की “रोजगार दो–सामाजिक न्याय दो” पदयात्रा का सातवें और अंतिम दिन वाराणसी में ऐतिहासिक समापन हुआ. बीते सात दिनों में इस पदयात्रा को युवाओं, मज़दूरों, किसानों, बुनकरों, दलितों, पिछड़ों, महिलाओं और बेरोज़गारों का व्यापक समर्थन मिला. गुरुवार को सारनाथ में दर्शन के साथ पदयात्रा का समापन हुआ, जिसके बाद लाल बहादुर शास्त्री घाट, सिकरौल में विशाल जनसभा आयोजित की गई. इस अवसर पर राज्यसभा सांसद एवं आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने ऐलान किया कि “रोज़गार दो–सामाजिक न्याय दो” आंदोलन यहीं नहीं रुकेगा और संभवतः फरवरी के अंत में चौथे चरण की पदयात्रा की शुरुआत की जाएगी, जिसमें जनता की और भी बड़ी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी.
सातवें व अंतिम दिन संजय सिंह के नेतृत्व में पदयात्रा दोपहर 12 बजे गोकुल निकुंज बैंक्वेट, हवेलिया चौराहा, सारनाथ, वाराणसी से प्रारंभ होकर लगभग डेढ़ किलोमीटर चलने के बाद सारनाथ मंदिर पहुंची. पूरे मार्ग में लोगों ने फूलों की वर्षा, नारों और स्वतःस्फूर्त सहभागिता के साथ पदयात्रा का स्वागत किया. युवाओं के हाथों में रोज़गार की मांग वाले पोस्टर थे और बुज़ुर्गों, महिलाओं व बच्चों की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि यह संघर्ष केवल एक दिन का नहीं, बल्कि भविष्य की लड़ाई है.
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सारनाथ मंदिर दर्शन के उपरांत संजय सिंह लाल बहादुर शास्त्री घाट, सिकरौल, नदेसर, वाराणसी पहुंचे, जहां उन्होंने विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज की राजनीति में शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, सड़क, खाद और रोज़गार जैसे असली मुद्दों को जानबूझकर हाशिये पर धकेला जा रहा है. उन्होंने कहा कि देश में नफरत की राजनीति इसलिए कराई जा रही है ताकि जनता अपने सवाल न पूछ सके. मिर्ज़ापुर से वाराणसी तक की पदयात्रा में जगह-जगह बुलडोज़र से घर तोड़े गए, चौड़ीकरण और परियोजनाओं के नाम पर ज़मीनें छीनी गईं और हजारों एकड़ पर कब्ज़े किए गए. उन्होंने कहा कि एक आदमी पूरी ज़िंदगी की कमाई से घर बनाता है और सरकार एक मिनट में उसे उजाड़ देती है. संजय सिंह ने आरोप लगाया कि वाराणसी में पौराणिक मंदिरों, मूर्तियों और अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा तक को नहीं बख्शा गया और जब इन मुद्दों को उठाया गया तो उन पर ही मुक़दमे दर्ज कर दिए गए.
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संजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सवाल करते हुए कहा कि हर साल दो करोड़ नौकरियों का वादा करने वाली सरकार 12 साल में 24 करोड़ नौकरियां क्यों नहीं दे सकी. उन्होंने कहा कि अगर उत्तर प्रदेश में 45 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है, तो कम से कम 45 लाख युवाओं को नौकरी मिलनी चाहिए थी. उन्होंने दो टूक कहा कि आम आदमी पार्टी की मांग साफ है नौकरी दो, या 18 साल से ऊपर के हर नौजवान को हर महीने 10,000 रुपये बेरोज़गारी भत्ता दो. सामाजिक न्याय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि संविधान का सही पालन ही सामाजिक न्याय है, लेकिन आज दलितों, पिछड़ों और वंचितों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है. उन्होंने शिक्षा, संविधान और भाईचारे की राजनीति पर ज़ोर देते हुए कहा कि नफरत की राजनीति खत्म होगी तो अपने आप मुद्दों की राजनीति मजबूत होगी.
अंत में संजय सिंह ने कहा कि सारनाथ की धरती ने दुनिया को शांति और अहिंसा का संदेश दिया है और भारत तभी विश्व गुरु बनेगा जब वह इसी रास्ते पर चलेगा. उन्होंने जनता से अपील की कि आने वाले चौथे चरण की पदयात्रा में बड़ी संख्या में शामिल होकर रोज़गार और सामाजिक न्याय की इस लड़ाई को और मजबूत करें. उन्होंने भरोसा दिलाया कि संसद के हर मंच पर वाराणसी और उत्तर प्रदेश की जनता के मुद्दों को पूरी ताकत से उठाया जाएगा.
पदयात्रा के समापन पर आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश ने स्पष्ट किया कि “रोजगार दो–सामाजिक न्याय दो” केवल एक अभियान नहीं, बल्कि बेरोज़गारी, अन्याय और नफरत की राजनीति के खिलाफ जनआंदोलन है, जिसे सड़क से लेकर सदन तक मजबूती से आगे बढ़ाया जाएगा.
विधायक सुरेन्द चौधरी,पूर्व विधायक/प्रदेश सहप्रभारी दिलीप पांडेय, नि. प्रदेश अध्यक्ष सभाजीत सिंह, पूर्वांचल प्रान्त अध्यक्ष राजेश यादव, पूर्वांचल प्रान्त प्रभारी अनुराग मिश्रा, प्रदेश महासचिव दिनेश पटेल, मीडिया क्वार्डिनेटर सर्वेश मिश्रा,काशी प्रान्त अध्यक्ष पवन तिवारी, मुख्य प्रवक्ता वंशराज दूबे, प्रदेश प्रवक्ता मुकेश सिंह, जिलाध्यक्ष कैलाश पटेल,प्रदेश प्रवक्ता मनीष गुप्ता,पंकज अवाना, अंकुश चौधरी, कमांडो अशोक, नीलम यादव, प्रशांत यादव, शारदा टंडन, अजीत सिंह,अमर सिंह पटेल,पल्लवी वर्मा,संजीव निगम, जिला मीडिया प्रभारी घनश्याम पांडेय, देवकांत वर्मा आदि.