TrendingBharat BandhiranDonald Trump

---विज्ञापन---

डॉ. वैदेही तामण की पुस्तकों से युवाओं के बीच फिर जीवित हुआ सावरकर विमर्श

मुंबई में वीर सावरकर के जीवन और विचारधारा पर आधारित तीन पुस्तकों का विमोचन स्वामी विज्ञानंद सरस्वती और मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा की मौजूदगी में हुआ. लेखिका डॉ. वैदेही तामण ने कहा कि इन पुस्तकों का उद्देश्य युवाओं को सावरकर के राष्ट्र दृष्टिकोण से फिर से परिचित कराना है.

वीर स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रवादी विचारक वीर सावरकर के जीवन, विचारधारा और राष्ट्रदृष्टि पर आधारित तीन पुस्तकों का विमोचन मुंबई के विले पार्ले पूर्व में एक गरिमामय कार्यक्रम में संपन्न हुआ. इस अवसर पर बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, लेखक, समाजचिंतक और युवा पाठक उपस्थित रहे. पुस्तकों का विमोचन प्रसिद्ध चिंतक स्वामी विज्ञानंद सरस्वती ने किया, जबकि महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे.

इन पुस्तकों के हिंदी और मराठी संस्करण अस्तित्व प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किए गए हैं, जबकि अंग्रेज़ी संस्करण Reclaiming Bharat का प्रकाशन प्रभात प्रकाशन ने किया है. वीर सावरकर की क्रांतिकारी यात्रा (हिंदी) , वीर सावरकरची क्रांतिकारी यात्रा (मराठी) और Reclaiming Bharat (अंग्रेज़ी) तीनों ही पुस्तकें सावरकर के क्रांतिकारी संघर्ष, वैचारिक स्पष्टता और राष्ट्रनिर्माण के उनके दीर्घकालिक दृष्टिकोण को सरल और प्रवाहपूर्ण भाषा में प्रस्तुत करती हैं.

---विज्ञापन---

पुस्तक विमोचन के दौरान लेखिका डॉ. वैदेही तामण ने कहा, “हम सावरकर—यानी ‘त्याता’—की कथाएँ सुनते हुए बड़े हुए हैं. इसी कारण मैं जानती हूँ कि भारत के लिए उनका स्वप्न क्या था. कुछ तथाकथित सेकुलर वर्ग अपनी राजनीतिक असुरक्षा के कारण युवाओं के मन में सावरकर के विरुद्ध विष भर रहे हैं. मेरा उद्देश्य जेन-ज़ी को सावरकर से दोबारा परिचित कराना है.”

---विज्ञापन---

अपने संबोधन में स्वामी विज्ञानंद सरस्वती ने कहा, “सावरकर सौ साल पहले भी प्रासंगिक थे और आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं. सावरकर पर कई मोटी किताबें लिखी गई हैं, लेकिन मैं डॉ. वैदेही की प्रशंसा करता हूँ कि उन्होंने युवाओं और सामान्य पाठकों के लिए सावरकर को समझने योग्य बनाया. हमें हिंदू समाज, व्यापार और राष्ट्रशक्ति को एक सूत्र में बाँधकर सावरकर के भारत स्वप्न को साकार करना होगा.”

मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने युवाओं से आग्रह किया कि वे इतिहास को दूसरों की व्याख्या से नहीं, बल्कि मूल पुस्तकों को पढ़कर समझें. कार्यक्रम का समापन संवाद सत्र और लेखिका के सम्मान के साथ हुआ, जिसने यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रवादी साहित्य में अब स्पष्ट, सरल और युवा-केंद्रित लेखन की माँग तेज़ी से बढ़ रही है.


Topics:

---विज्ञापन---