ईमानदारी पर कोई समझौता नहीं: मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में पंजाब सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
Author: Mohd Tahleel Chaudhary
Jan 09, 2026 06:37 PM IST
पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने यह साफ कर दिया है कि कानून, संविधान और ईमानदारी से समझौता किसी भी सूरत में नहीं किया जाएगा. सरकार की नीति स्पष्ट है चाहे अधिकारी कितना भी बड़ा क्यों न हो, अगर नियमों की अनदेखी या भ्रष्टाचार में लिप्त पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है. हाल में सामने आए दो मामलों ने यह साबित कर दिया है कि मान सरकार का जीरो टॉलरेंस केवल घोषणा नहीं, बल्कि ज़मीन पर लागू नीति है.
पहला मामला रूपनगर जिले से जुड़ा है, जहां पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने आयोग के निर्देशों का पालन न करने पर रूपनगर के पुलिस अधीक्षक को तलब किया है. आयोग के अध्यक्ष एस. जसवीर सिंह गढ़ी के अनुसार, यह मामला होशियारपुर जिले की गढ़शंकर तहसील में स्थित सचखंड खुरालगढ़ साहिब के पास चरण छोह गंगा अमृत कुंड से जुड़ा है. कुंड के अध्यक्ष संत सुरिंदर दास ने डीएसपी नांगल अमनदीप सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. आयोग द्वारा मांगी गई तथ्यात्मक रिपोर्ट समय पर पेश न किए जाने पर एसपी (डिटेक्टिव) रूपनगर गुरदीप सिंह गोसल को 14 जनवरी 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए गए हैं.
राज्य सरकार किसी को नहीं बख्शती: रिश्वत लेते एएसआई रंगे हाथों गिरफ्तार
दूसरा मामला कपूरथला जिले से सामने आया है, जहां पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने रिश्वत लेते हुए एक एएसआई को रंगे हाथों गिरफ्तार किया. फागवारा सिटी पुलिस स्टेशन में तैनात एएसआई सरबजीत सिंह पर आरोप है कि उसने जमानत दिलाने के बदले 5,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी. शिकायत मिलते ही विजिलेंस ने कार्रवाई कर आरोपी को पकड़ लिया.
गिरफ्तार एएसआई को अदालत में पेश कर दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है. इन दोनों मामलों ने एक बार फिर साबित किया है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार में कानून से ऊपर कोई नहीं और भ्रष्टाचार या लापरवाही करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है.