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गुलामी की सोच से देश को मुक्त करे युवा, विकसित भारत संवाद में पीएम का आह्वान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग–2026’ के समापन सत्र में देशभर से आए हजारों युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का भविष्य आज की युवा पीढ़ी के हाथों में है और यही युवा शक्ति विकसित भारत की असली इंजन है. उन्होंने कहा कि नवाचार, ऊर्जा और स्पष्ट लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही युवा पीढ़ी देश को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग–2026’ के समापन सत्र में देशभर से आए हजारों युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का भविष्य आज की युवा पीढ़ी के हाथों में है और यही युवा शक्ति विकसित भारत की असली इंजन है. उन्होंने कहा कि नवाचार, ऊर्जा और स्पष्ट लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही युवा पीढ़ी देश को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी.

प्रधानमंत्री ने भावुक अंदाज़ में कहा कि जब उन्होंने पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब आज के कई युवा जन्मे भी नहीं थे और 2014 में जब वे प्रधानमंत्री बने, तब अधिकांश युवा बच्चे थे. इसके बावजूद उनका युवाओं पर भरोसा कभी नहीं बदला. उन्होंने कहा, 'मैं हमेशा आपकी ऊर्जा से ऊर्जा लेता रहा हूं और आज आप ही विकसित भारत के लक्ष्य की बागडोर संभाले हुए हैं.'

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पीएम मोदी ने कहा कि आज से 2047 तक का कालखंड भारत और उसके युवाओं, दोनों के लिए बेहद अहम है. युवाओं की क्षमताएं ही देश की ताकत तय करेंगी और उनकी सफलता भारत को वैश्विक ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी. उन्होंने इस संवाद में भाग लेने वाले युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि युवा नेतृत्व के बिना विकसित भारत का सपना पूरा नहीं हो सकता.

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स्वामी विवेकानंद की जयंती का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हर साल 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है और इसी प्रेरणा से इस तारीख को ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ के लिए चुना गया है. उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन और विचार आज भी युवाओं के लिए मार्गदर्शक हैं और राष्ट्रनिर्माण की दिशा दिखाते हैं.

प्रधानमंत्री ने बताया कि यह मंच अब युवाओं की सीधी भागीदारी का एक बड़ा केंद्र बन चुका है. उन्होंने कहा कि इस पहल से 5 करोड़ नहीं बल्कि 50 लाख से ज्यादा युवा जुड़े, जिनमें से 30 लाख से अधिक युवाओं ने विकसित भारत चैलेंज में भाग लेकर अपने विचार साझा किए. उन्होंने इसे युवाओं की अभूतपूर्व भागीदारी बताया.

महिलाओं के नेतृत्व में विकास और लोकतंत्र में युवाओं की भागीदारी जैसे विषयों पर आए सुझावों की तारीफ करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह भारत की अमृत पीढ़ी की परिपक्व सोच को दिखाता है. उन्होंने जेन–ज़ी की रचनात्मकता और नवाचार की भी सराहना की.

प्रधानमंत्री ने 2014 से पहले के दौर को याद करते हुए कहा कि तब देश में नीतिगत जड़ता, लालफीताशाही और अवसरों की कमी थी. नौकरी, परीक्षा या व्यवसाय शुरू करने के लिए युवाओं को लंबी प्रक्रियाओं और देरी का सामना करना पड़ता था. आज जो बातें असामान्य लगती हैं, वे तब आम बात थीं.

स्टार्टअप सेक्टर का उदाहरण देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 2014 से पहले भारत में 500 से भी कम पंजीकृत स्टार्टअप थे और सरकार हर क्षेत्र पर हावी थी. युवाओं की प्रतिभा को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल पाता था. इसके बाद स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और टैक्स व अनुपालन सुधारों ने देश में स्टार्टअप क्रांति की नींव रखी.

अंतरिक्ष क्षेत्र का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले यह केवल इसरो तक सीमित था, लेकिन निजी क्षेत्र के लिए दरवाजे खोलने के बाद 300 से अधिक स्पेस स्टार्टअप सामने आए हैं. स्कायरूट और अग्निकुल जैसी कंपनियां आज दुनिया में भारत की पहचान बना रही हैं.

ड्रोन और रक्षा क्षेत्र में भी बदलाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आसान नियमों के चलते आज हजार से ज्यादा रक्षा स्टार्टअप काम कर रहे हैं—कोई ड्रोन बना रहा है, कोई एंटी-ड्रोन सिस्टम, कोई एआई कैमरे तो कोई रोबोटिक्स पर काम कर रहा है.

प्रधानमंत्री ने ऑरेंज इकॉनॉमी यानी संस्कृति, कंटेंट और क्रिएटिविटी आधारित अर्थव्यवस्था के तेज विस्तार की भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि भारत आज फिल्म, गेमिंग, म्यूज़िक, डिजिटल कंटेंट, VR-XR और मीडिया के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बन रहा है और इससे युवाओं के लिए अपार अवसर पैदा हो रहे हैं.

पीएम मोदी ने कहा कि बीते एक दशक में सुधारों की रफ्तार तेज हुई है और इसका केंद्र युवा हैं. जीएसटी सुधार, 12 लाख रुपये तक टैक्स राहत और ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव से रोजगार और निवेश दोनों को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही उन्होंने बताया कि पीएम-सेतु योजना के तहत हजारों आईटीआई को अपग्रेड किया जा रहा है ताकि युवा भविष्य की जरूरतों के मुताबिक तैयार हो सकें.

प्रधानमंत्री ने औपनिवेशिक मानसिकता पर भी चोट करते हुए कहा कि मैकाले की शिक्षा नीति ने भारतीयों में हीनभावना पैदा की थी. उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि देश को इस गुलामी की मानसिकता से मुक्त करने का संकल्प लें.


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