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यंत्र इंडिया लिमिटेड को मिला मिनीरत्न-I का दर्जा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी मंजूरी

यह दर्जा रक्षा मंत्रालय की ‘आत्मनिर्भरता’ रणनीति का हिस्सा है, जो सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों को मजबूत बनाने पर केंद्रित है. मिनीरत्न स्थिति से YIL को वित्तीय लचीलापन मिलेगा, जिसका उपयोग नवाचार, R&D और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में किया जा सकेगा.

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) सहित प्रमुख रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों को मिनीरत्न श्रेणी-I का दर्जा प्रदान करने की मंजूरी प्रदान की है. इस महत्वपूर्ण फैसले से इन कंपनियों को सरकारी मंजूरी के बिना 500 करोड़ रुपये तक के निवेश की वित्तीय स्वायत्तता मिल जाएगी. यह कदम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा योगदान देगा, जहां उत्पादन क्षमता बढ़ाने, परिचालन दक्षता सुधारने और तेज निर्णय लेने पर जोर दिया जा रहा है. मिनीरत्न-I दर्जे के बाद YIL जैसे उपक्रम नए प्रोजेक्ट शुरू करने, संयंत्रों का आधुनिकीकरण करने तथा उपकरण खरीद में स्वतंत्रता हासिल कर सकेंगे, जिससे रक्षा निर्यात और स्वदेशीकरण को गति मिलेगी.

वाईआईएल की स्थापना के बाद से कंपनी ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है. वित्त वर्ष 2021-22 (दूसरी छमाही) में बिक्री 956.32 करोड़ रुपये थी, जो 2024-25 में बढ़कर 3,108.79 करोड़ रुपये हो गई. इसी तरह निर्यात में भी जबरदस्त उछाल आया- 2021-22 (H2) से 2024-25 तक 321.77 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई. कंपनी के प्रमुख उत्पादों में कार्बन फाइबर कंपोजिट सामग्री, मध्यम एवं बड़े कैलिबर गोला-बारूद की असेंबली, बख्तरबंद वाहनों के पुर्जे, आर्टिलरी तोपें, मुख्य युद्धक टैंक (MBT) के लिए असेंबली उत्पाद, ग्लास कंपोजिट तथा एल्यूमीनियम मिश्र धातु शामिल हैं. ये उत्पाद न केवल भारतीय सेना की जरूरतें पूरी करते हैं, बल्कि निर्यात बाजारों में भी भारत का लोहा मनवा रहे हैं.

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यह दर्जा रक्षा मंत्रालय की ‘आत्मनिर्भरता’ रणनीति का हिस्सा है, जो सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों को मजबूत बनाने पर केंद्रित है. मिनीरत्न स्थिति से YIL को वित्तीय लचीलापन मिलेगा, जिसका उपयोग नवाचार, R&D और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में किया जा सकेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे रक्षा क्षेत्र में निजी निवेश आकर्षित होगा और ‘मेक इन इंडिया’ को बल मिलेगा. कुल मिलाकर, यह फैसला रक्षा उत्पादन की गति तेज करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा.

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