चुनाव आयोग ने बुधवार को राज्यसभा की 37 सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी है. इन सीटों पर 16 मार्च को मतदान होगा और उसी शाम नतीजों का एलान कर दिया जाएगा. चुनाव के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन 26 फरवरी को जारी होगा और उम्मीदवार 5 मार्च तक अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे. नामांकन पत्रों की जांच 6 मार्च को होगी और नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 9 मार्च तय की गई है. मतदान सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगा जिसके बाद शाम 5 बजे से गिनती शुरू होगी. इस पूरी प्रक्रिया को 20 मार्च तक संपन्न कर लिया जाएगा.
हरियाणा में जीत का गणित और समीकरण
हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव में विधायकों का संख्या बल सबसे अहम भूमिका निभाएगा. राज्य की 90 सदस्यीय विधानसभा में एक सीट जीतने के लिए कम से कम 31 वोटों की जरूरत होगी. वर्तमान स्थिति के अनुसार 51 विधायकों वाली भाजपा और 37 विधायकों वाली कांग्रेस के खाते में एक-एक सीट जाना तय माना जा रहा है. राज्यसभा चुनाव की वोटिंग प्रक्रिया लोकसभा से अलग होती है जहाँ विधायक अपनी पसंद की प्राथमिकता बैलेट पेपर पर दर्ज करते हैं. चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है कि वोटिंग के लिए केवल आधिकारिक बैंगनी स्केच पेन का ही इस्तेमाल किया जाएगा और किसी अन्य पेन के प्रयोग पर वोट रद्द माना जाएगा.
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इन राज्यों में खाली हो रही हैं सीटें
इस बार सबसे ज्यादा 7 सीटें महाराष्ट्र में खाली हो रही हैं. इसके अलावा तमिलनाडु में 6, बिहार और पश्चिम बंगाल में 5-5 और ओडिशा में 4 सीटों पर चुनाव होंगे. असम में 3, छत्तीसगढ़, हरियाणा और तेलंगाना में 2-2 जबकि हिमाचल प्रदेश में 1 सीट के लिए वोट डाले जाएंगे. इन सीटों पर अप्रैल 2026 में कार्यकाल खत्म हो रहा है. प्रमुख सदस्यों में शरद पवार, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी, टीएमसी के साकेत गोखले और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह जैसे दिग्गज नेता शामिल हैं जिनका कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है.
राजनीतिक समीकरणों पर पड़ेगा असर
राज्यसभा चुनाव में व्हिप जारी नहीं किया जा सकता है जिसके कारण क्रॉस वोटिंग की संभावना बनी रहती है. साल 2020 में जब इन सीटों पर चुनाव हुए थे तब भाजपा ने असम, बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों में बढ़त हासिल की थी. हालांकि अब राज्यों की विधानसभाओं में बदलते संख्या बल के कारण उच्च सदन की संरचना में मामूली बदलाव देखने को मिल सकते हैं. महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी के विभाजन के बाद यह चुनाव और भी रोचक हो गया है क्योंकि वहां वोट कई गुटों में बंटने की आशंका है. चुनाव आयोग ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए विशेष पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करने का फैसला भी लिया है.
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