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कौन हैं डॉ. वेलुमणि? कभी 150 रुपए की नौकरी आज अरबों के मालिक, जिनकी एक पोस्ट ने छेड़ दी बहस

बेहद गरीबी से निकलकर 4500 करोड़ का साम्राज्य खड़ा करने वाले डॉ. वेलुमणि की कहानी प्रेरणा से भरी है. 150 रुपए की नौकरी से अरबपति बनने का उनका सफर युवाओं को रोमांचित करता है.

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थायरोकेयर के संस्थापक डॉ. अरोग्यस्वामी वेलुमणि की जीवन कहानी आत्म-विश्वास और कड़ी मेहनत की एक मिसाल है. अप्रैल 1959 में कोयंबटूर के पास एक बेहद गरीब किसान परिवार में जन्मे वेलुमणि का बचपन अभावों में बीता. वे मीलों पैदल चलकर स्कूल जाते थे और उनके पास बुनियादी सुख-सुविधाएं तक नहीं थीं, लेकिन उनकी मां ने उन्हें अनुशासन और शिक्षा का महत्व सिखाया. गरीबी के कारण वे पहले बी.कॉम करना चाहते थे, लेकिन एक शिक्षक की मदद से उन्होंने 1978 में केमिस्ट्री में बीएससी पूरी की.

महज 150 रुपए से करियर की शुरुआत

पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें कई नौकरियों से रिजेक्शन झेलना पड़ा, जिसने उन्हें फ्रेशर्स को मौका देने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने एक छोटी फार्मा कंपनी में शिफ्ट केमिस्ट के रूप में अपना करियर शुरू किया, जहां उन्हें महीने के सिर्फ 150 रुपए मिलते थे. इसमें से भी वे ज्यादातर पैसे अपने घर भेज देते थे. साल 1982 में कंपनी बंद होने के बाद वे मुंबई आ गए और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) में वैज्ञानिक सहायक के तौर पर शामिल हुए. यहीं काम करते हुए उन्होंने थायराइड बायोकेमिस्ट्री में अपनी डॉक्टरेट पूरी की.

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1 लाख रुपए से खड़ी की बड़ी कंपनी

भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में 14 साल काम करने के बाद वेलुमणि ने अपनी खुद की कंपनी शुरू करने का बड़ा रिस्क लिया. उनकी पत्नी ने भी उनका साथ दिया और अपनी बैंक की नौकरी छोड़ दी. साल 1995 में अपने पीएफ के 1 लाख रुपए लगाकर उन्होंने मुंबई के भायखला में एक छोटी सी टेस्टिंग लैब खोली. उनका मकसद था कि थायराइड की जांच इतनी सस्ती हो जाए कि गरीब से गरीब व्यक्ति भी इसे करा सके. उन्होंने बहुत ही कम कीमत पर बेहतरीन सर्विस देकर मार्केट में अपनी जगह बनाई.

करोड़ों में बेची हिस्सेदारी और बनाया रिकॉर्ड

डॉ. वेलुमणि ने अपनी कंपनी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया और देश भर में कलेक्शन सेंटरों का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा किया. साल 2021 में उन्होंने थायरोकेयर में अपनी 66 प्रतिशत हिस्सेदारी फार्म-ईजी को 4,546 करोड़ रुपए में बेचकर सबको चौंका दिया. यह भारत में पहली बार था जब किसी स्टार्टअप ने किसी लिस्टेड कंपनी को खरीदा हो. आज भी वे एपीआई होल्डिंग्स में हिस्सेदारी रखते हैं और एक सफल बिजनेसमैन के रूप में युवाओं को प्रेरित करते हैं.

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लेखक के बारे में

Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.
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