असम की राजनीति में अचानक चर्चा के केंद्र में आए नेता भूपेन बोरा इन दिनों सुर्खियों में हैं. अब वो कांग्रेस का हाथ छोड़कर बीजेपी का दामन थामने वाले हैं. कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई बड़े नेताओं ने उन्हें मनाने की कोशिश की. लेकिन वो अपनी बात पर अड़े रहे और आखिरकार कांग्रेस का साथ छोड़ दिया. खासतौर पर 2026 विधानसभा चुनाव से पहले इसे बीजेपी के लिए बड़ी मजबूती और कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. लेकिन सवाल ये है कि भूपेन बोरा कौन हैं, उनका राजनीतिक सफर क्या रहा है और असम की राजनीति में उनकी कितनी अहम भूमिका रही है? आइए आसान भाषा में विस्तार से समझते हैं.
ये भी पढ़ें: असम कांग्रेस को लगेगा बड़ा झटका! हिमंता सरमा का दावा- 22 फरवरी को BJP में शामिल होंगे भूपेन बोरा
कैसे हुई राजनीति में एंट्री?
भूपेन बोरा असम के एक शिक्षित और राजनीतिक रूप से सक्रिय परिवार से आते हैं. भूपेन बोरा का जन्म 30 अक्टूबर, 1970 को असम के लखीमपुर में हुआ था. उन्होंने नॉर्थ लखीमपुर कॉलेज और डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया. उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ छात्र राजनीति से अपने करियर की शुरुआत की. बोरा नॉर्थ लखीमपुर कॉलेज स्टूडेंट्स यूनियन के वाइस-प्रेसिडेंट
और डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी पोस्टग्रेजुएट स्टूडेंट्स यूनियन के जनरल सेक्रेटरी रह चुके हैं. कॉलेज के दिनों से ही वो सामाजिक मुद्दों और जनसमस्याओं को लेकर मुखर रहे, जिसकी वजह से उन्हें युवा नेताओं में गिना जाने लगा.
कांग्रेस से रहा खास जुड़ाव
भूपेन बोरा का राजनीतिक सफर मुख्य रूप से कांग्रेस के साथ जुड़ा रहा. उन्होंने पार्टी में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं और जमीनी राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाई. संगठनात्मक कामकाज और कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रियता के चलते वो धीरे-धीरे पार्टी के बड़े नेताओं में शामिल हो गए. कांग्रेस नेतृत्व ने उनके अनुभव और संगठन क्षमता को देखते हुए उन्हें असम प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया. बोरा ने असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के चीफ के तौर पर 2021 से 2024 तक काम किया. इस पद पर रहते हुए भूपेन बोरा ने पार्टी को दोबारा मजबूत करने की कोशिश की और सरकार के खिलाफ कई मुद्दों पर मुखर विरोध किया. मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के समय वो असम सरकार के प्रवक्ता और पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी भी थे.
ये भी पढ़ें: हेट स्पीच मामले में असम के CM हिमंता पर बेंगलुरु में FIR, सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार
कांग्रेस से क्यों दूर हुए बोरा?
भूपेन बोरा असम विधानसभा के सदस्य भी रह चुके हैं. वो 2006 से 2016 तक बिहपुरिया विधानसभा क्षेत्र के MLA रहे. विधायक के रूप में उन्होंने अपने क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दों को उठाया. स्थानीय जनता के बीच उनकी छवि एक सुलझे हुए और एक्टिव नेता की रही है, जो सीधे लोगों से जुड़कर उनकी समस्याएं सुनते थे. हाल के सालों में कांग्रेस की आंतरिक राजनीति, संगठनात्मक कमजोरियों और नेतृत्व को लेकर असंतोष की खबरें सामने आती रही हैं. माना जा रहा है कि इन्हीं वजहों से भूपेन बोरा धीरे-धीरे पार्टी नेतृत्व से दूरी बनाने लगे और आखिरकार उन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़ ही दिया. अब वो 22 फरवरी को बीजेपी में शामिल होने वाले हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी में भूपेन बोरा को संगठनात्मक जिम्मेदारी या चुनावी रणनीति में अहम भूमिका मिल सकती है. उनका अनुभव और क्षेत्रीय पकड़ पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है.
संबंधित खबरें
महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तीकरण पर पीएम मोदी का जोर
1 hr agoदिल्ली मेट्रो पर बड़ा अपडेट, अब 57 नहीं 45 स्टेशन बंद; कर सकेंगे इंटरचेंज
2 hrs agoदिल्ली में 10 अक्टूबर को इन रास्तों पर जाने से बचें, ट्रैफिक एडवाइजरी जारी
2 hrs ago'अपने राज्य में न दें प्रदर्शन की अनुमति', गृह मंत्रालय का निर्देश
3 hrs ago'राष्ट्रपति ने हमारी बात मानी, अब जाएंगे SC', राहुल गांधी का बड़ा बयान
3 hrs agoमेट्रो-ट्रेनें बंद करने पर सांसद राजीव शुक्ला ने जताया ऐतराज
3 hrs ago'सरकार को बर्खास्त करना होगा', इंडिया गठबंधन की बैठक में बोले राहुल गांधी
4 hrs agoदिल्ली में सख्त पाबंदी! स्कूल से लेकर मेट्रो और इंटरनेट तक, क्या-क्या बंद?
5 hrs agoदिल्ली के रेलवे स्टेशनों पर प्रदर्शन का असर, कौन-कौन सी ट्रेनें रद्द?
6 hrs agoट्रेन में असुरक्षित महसूस कर रही थी असम की छात्रा, बाद में मिला शव
8 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines