Padma Award 2026: साल 2026 के लिए पद्म पुरस्कार की संभावित सूची सामने आ गई है। इस बार खास बात है कि सूची में किसी खास का नाम नहीं है। सूची में पद्म पुरस्कार पाने वाले सभी गुमनाम नायक शामिल हैं। ये वे गुमनाम नायक हैं जिन्होंने सालों गुमनामी से स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, आजीविका, स्वच्छता, सतत विकास में अपना योगदान दिया है।
इस बार भारत ने ऐसे गुमनाम नायकों को पहचान कर उन्हें पद्म पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला लिया है। ऐसा ही एक गुमनाम है कर्नाटक के अंके गौड़ा का। साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में पद्म श्री 2026 के लिए गौड़ा को नामित किया गया है।
75 साल के अंके गौड़ा कर्नाटक के रहने वाले हैं। इ्न्होंने अपनी पूरी उम्र एक विशालकाय लाइब्रेरी बनाने में खपा दी। आज इनकी लाइब्रेरी में करीब 2 करोड़ किताबें हैं। ये लाइब्रेरी रिसर्च करने वालों के लिए तीर्थ बन गया है। इन्होंने महज 20 साल की उम्र में कंडक्टर की नौकरी शुरू की थी। बस तभी से किताबें इकठ्ठी करनी शुरू कर दीं।
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अंके गौड़ा की यह लाइब्रेरी कर्नाटक के मैसूर में पांडवपुरा गांव में है। जानकारी के अनुसार, कन्नड़ साहित्य में मास्टर डिग्री करने के लिए अंके ने कंडक्टर की नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद करीब 30 सालों तक चीनी मिलों में काम किया। अंके की ज्यादातर कमाई किताबें खरीदने में चली गई। इतना ही नहीं अंके ने किताबों को संग्रह बढ़ाने के लिए मैसूर स्थित अपना घर तक बेच दिया।
बता दें कि लाइब्रेरी में 50 लाख विदेशी पुस्तकें और 5,000 से ज्यादा बहुभाषी शब्दकोश शामिल हैं। अंके अपनी पत्नी विजयलक्ष्मी और बेटे सागर के साथ लाइब्रेरी में ही रहते हैं। सामान्य जीवन बिताकर लोगों की पढ़ाई में मदद करते हैं। कर्नाटक में शिक्षा में बेहद योगदान पर उनके नाम की मिशालें दी जाती हैं।
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कमाल की बात यह है कि इस लाइब्रेरी में सिर्फ स्कूली छात्रों और शोधकर्ता ही नहीं आते, यहां तक की सिविल सेवा के उम्मीदवारों और सुप्रीम कोर्ट के जज तक यहां की किताबों का रेफरेंस लेने आ चुके हैं। इस पुस्तकालय में 20 से ज्यादा भारतीय और विदेशी भाषाओं की किताबें हैं। इसमें साहित्य, विज्ञान, तकनीक, पौराणिक कथाएं, दर्शन और दुर्लभ पांडुलिपियां शामिल हैं। अंके के अनुसार, किताबें इकट्ठा करना ही उनका अंतिम लक्ष्य नहीं है। बताया कि उनका सपना पुस्तकालय को ज्ञान का केंद्र बनाना है। जहां कोई भी स्वतंत्र रूप से सीख सके।
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