महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बुधवार का दिन एक भीषण त्रासदी का गवाह बना. उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख अजित पवार का बारामती में एक दर्दनाक विमान हादसे में निधन हो गया. हादसा उस वक्त हुआ जब वे जिला परिषद चुनाव के लिए एक जनसभा को संबोधित करने जा रहे थे. अजित पवार के अचानक निधन से न केवल महाराष्ट्र सरकार में एक बड़ा शून्य पैदा हुआ है, बल्कि उनकी पार्टी 'एनसीपी' के अस्तित्व पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं.
इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में उनकी विरासत के वारिस को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. सवाल उठ रहे हैं कि क्या उनकी पत्नी या बेटे इस कठिन समय में पार्टी की कमान संभाल पाएंगे? या फिर, जैसा कि पिछले कुछ समय से अटकलें लगाई जा रही थीं, अब अजित पवार का गुट वापस शरद पवार के साथ विलय की राह पकड़ेगा?
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अजित पवार बुधवार सुबह बारामती जा रहे थे, तभी लैंड करते वक्त उनका चार्टर्ड विमान क्रैश हो गया और आग की लपटों में घिर गया. उस प्लेन में उनके समेत छह लोग थे, सबकी हादसे में मौत हो गई. अजित पवार के परिवार में पत्नी सुनेत्रा और दो बेटे, पार्थ और जय हैं. उनकी पत्नी सुनेत्रा राज्यसभा सांसद हैं.
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सुनेत्रा ने 2024 में पिछला लोकसभा चुनाव बारामती सीट से अपनी ननद सुप्रिया सुले के खिलाफ लड़ा था. लेकिन शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले के सामने सुनेत्रा को हार का सामना करना पड़ा. इससे पहले पवार परिवार में दरार पैदा हो गई थी. अजित पवार अपने चाचा शरद पवार को दूसरी बार छोड़कर एनडीए में शामिल हो गए थे.
कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो सुनेत्रा एनसीपी की कमान संभालेंगी. हालांकि, इसी बीच कुछ ऐसी रिपोर्ट्स भी आई हैं कि अजित पवार जल्द ही अपने चाचा के साथ वापस जाने वाले थे. लेकिन अजित पवार के निधन ने एक बार फिर पार्टी को शून्य पर छोड़ दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा हालात में पार्टी शरद पवार वाले गुट में विलय पर विचार कर सकती है.
पिछले कई महीनों से दोनों गुटों में सुलह के संकेत भी साफ दिख रहे थे. पवार परिवार के सदस्य कई कार्यक्रमों में एक साथ दिखाई दिए और तस्वीरें खिंचवाईं. इस महीने की शुरुआत में पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में नगर निगम चुनाव के लिए गठबंधन भी किया था. 5 फरवरी को होने वाले निकाय चुनाव के तीसरे चरण के लिए भी गठबंधन का ऐलान किया है.
कुछ रिपोर्ट्स में नई पीढ़ी को लेकर भी संभावना जताई जा रही है. अजित के बेटे पार्थ सियासत में तेजी से सक्रिय हो रहे हैं, उन्हें अजित पवार के उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है.
पार्थ ने साल 2019 में चुनावी राजनीति में कदम रखा था, उन्होंने मावल सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए थे. लेकिन उसके बाद लो-प्रोफाइल जिंदगी जी रहे हैं.
दूसरी ओर, शरद पवार अपने पोते रोहित पवार को नेतृत्व के लिए तैयार कर रहे हैं. पार्थ और रोहित के उभरने की वजह से हो सकता है कि दोनों गुटों के विलय में चुनौती आ सकती है. हालांकि, यह देखना होगा कि क्या अजित पवार की बीवी सुनेत्रा, शरद पवार के नेतृत्व को कबूल कर पाएंगी.
अगर एनसीपी का विलय नहीं किया जाता और वह अलग पार्टी ही रहना चाहती है तो सुनेत्रा या पार्थ में से किसी एक के कमान संभालने की संभावना है.