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क्या है रॉकेट फोर्स, जिसकी भारत को सख्त जरूरत? चीन-पाकिस्तान के पास हैं कितनी और कौन-कौन सी मिसाइलें

Indian Army Rocket Missile Force: पाकिस्तान और चीन की सीमा पर मौजूदा हालातों को देखते हुए रॉकेट-मिसाइल फोर्स को तैनात करना जरूरी हो गया है. इसलिए भारतीय सेना प्रमुख ने रॉकेट-मिसाइल फोर्स को अब भारत की सबसे बड़ी और सबसे पहली जरूरत बताया है.

भारत के लिए रॉकेट-मिसाइल फोर्स की जरूरत बढ़ गई है.

Indian Army Power vs China Pakistan: भारतीय सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने रॉकेट-मिसाइल फोर्स को भारत की सबसे बड़ी जरूरत बताया है. दिल्ली में एनुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ-साफ शब्दों में कहा कि भारत को एक ऐसी फोर्स चाहिए, जिसमें रॉकेट और मिसाइल दोनों हों. चीन और पाकिस्तान दोनों ऐसी फोर्स तैयार कर चुके हैं.

सेना प्रमुख का कहना है कि दोनों ही देशों से लगती सीमा पर भारत को ऐसी फोर्स को तैनात करने की जरूरत है, हालांकि भारत पिनाका रॉकेट लॉन्चर समेत कई मिसाइलें विकसित कर रहा है, लेकिन इन पर जल्द से जल्द काम करने की जरूरत है और इनका कंट्रोल किसके पास रहेगा, यह भी तय होना चाहिए, क्योंकि मौजूद हालात में यह फोर्स बेहद जरूरी हो गई है.

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क्या है रॉकेट फोर्स और भारत को कहां चाहिए?

रॉकेट-मिसाइल फोर्स लंबी दूरी की मिसाइलों और रॉकेट से भरी फोर्स है, जो कमांड सेंटर से लॉन्च की जाए तो दुश्मन के घर को तबाह करके छोड़ती है. इसके होने पर जवानों को दुश्मन के खेमे में घुसने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि घर बैठे ही दुश्मन को नुकसान पहुंचाया जा सकता है, लेकिन SIPRI के अनुसार, भारत के पास इनकी संख्या कम है.

वर्तमान समय में भारत को 2 मोर्चों पर रॉकेट और मिसाइल फोर्स की जरूरत है. एक और भारत को पश्चिम दिशा से पाकिस्तान से खतरा है, जो ARFC और फतेह सीरीज की मिसाइलों से भारत पर हमले कर सकता है. दूसरी ओर, उत्तर दिशा में चीन से खतरा है, जो हाइपरसोनिक मिसाइलें S-400 से भारत को नुकसान पहुंचा सकता है.

अगर दोनों देश मिलकर भारत पर हमला करते हैं तो उनके रॉकेट-मिसाइलों के आगे भारत का डिफेंस सिस्टम ओवरलोड हो सकता है, इसलिए भारत को रॉकेट-मिसाइल फोर्स की सबसे ज्यादा जरूरत है. हालांकि भारत के पास ब्रह्मोस और प्रलय मिसाइल हैं, लेकिन चीन के पास असंख्य मिसाइलें और रॉकेट हैं, जो नुकसानदायक हो सकते हैं.

हालांकि पाकिस्तान की मिसाइलों की क्वालिटी और रेंज भारत से कम है, लेकिन पाकिस्तान की AFRC मिसाइल नुकसान पहुंचा सकती है. भारत की अग्नि-5 मिसाइल पूरे चीन को तबाह कर सकती है, लेकिन इनकी संख्या कम है. कुल मिलाकर भारत की रॉकेट-मिसाइल फोर्स मजबूत है, लेकिन नंबर-टेक्नोलॉजी के मामले में दोनों से पीछे है.

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पाकिस्तान की रॉकेट-मिसाइल फोर्स

मई 202 में भारत के साथ युद्ध के बाद पाकिस्तान ने आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड (ARFC) बनाई है, जो नॉन-न्यूक्लियर मिसाइलों और रॉकेट्स पर बेस्ड है. ARFC को पाकिस्तान ने चीन की PLARF की तर्ज पर बनाया है, जिसमें फतेह सीरीज की मिसाइलें शामिल की गई हैं. पाकिस्तान की फोर्स छोटी, लेकिन तेजी से संख्या बढ़ रही है, क्योंकि एक अनुमान के अनुसार पाकिस्तान के पास अनुमानित 100-200 लॉन्चर हैं, जिनमें SRBM और MRBM शामिल हैं

. पाकिस्तान के पास 170 परमाणु वॉरहेड भी हैं. इसके अलावा फतेह-1 (140 किमी रेंज), फतेह-2 (250-400 किमी), फतेह-4 (750 किमी क्रूज मिसाइल, 2025 में टेस्ट) और फतेह-5 (2026 में संभावित टेस्ट, 1000 किमी रेंज) मिसाइल हैं. गजनवी (290 किमी), शाहीन-3 (2750 किमी) पूरे भारत को कवर करने में सक्षम हैं. अब पाकिस्तान ने चीन से PL-15 मिसाइलों की डील की है.

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चीन की रॉकेट और मिसाइल फोर्स

चीन की रॉकेट-मिसाइल फोर्स दुनिया की सबसे बड़ी और तेजी से बढ़ती शक्तिशाली है, जिसे पीपुल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स (PLARF) कहते हैं. पेंटागन 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के पास 600 न्यूक्लियर वॉरहेड हैं और 1200 से ज्यादा ग्राउंड-बेस्ड बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें हैं. 900+ छोटी दूरी (SRBM), 1300 मध्यम दूरी (MRBM), 500 इंटरमीडिएट (IRBM), 400+ ICBM (जैसे DF-41, 12,000+ किमी रेंज), हाइपरसोनिक मिसाइलें (DF-17, 5+ मैक स्पीड), एंटी-शिप और सटीक गाइडेंस वाली. नए साइलो (320+), सबमरीन-लॉन्च JL-3 और स्पेस-बेस्ड अर्ली वॉर्निंग सिस्टम भी है, जो भारत के नॉर्थ स्टेट्स को बेहद आसानी से निशाना बना सकती हैं.


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