जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पीर पंजाल क्षेत्र के अस्तित्व को लेकर हंगामा मचा हुआ है. दरअसल, जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटने के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बीते शुक्रवार अपना दूसरा बजट पेश किया, लेकिन इससे पहले सदन में पीर पंजाल के मुद्दे को लेकर जमकर बवाल हुआ.
वहीं, बीते दिनों भारतीय जनता पार्टी के नेता सुनील शर्मा ने एक इंटरव्यू में कहा कि पीर पंजाल का कोई वजूद नहीं है. ऐसा कोई नाम उन्होंने किसी भी शब्दकोश में नहीं सुना है. इसके साथ ही उन्होंने ये दावा भी किया कि जिस इलाके को पीर पंजाल कहते हैं उस क्षेत्र को पहले चंद्रभागा कहा जाता था.
सुनील शर्मा द्वारा दिए गए इस बयान के बाद से ही जम्मू-कश्मीर में बवाल मचा हुआ है. आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर का राजौरी और पुंछ जिला मिलकर पीर पंजाल के क्षेत्र को बनाते हैं. सुनील शर्मा के बयान के बाद इन दोनों इलाकों के विधायक और उमर अब्दुल्ला सरकार में मंत्री सुरिंदर चौधरी और जावेद राणा ने बीजेपी नेता से माफी मांगने की बात कही है. दोनों ने शर्मा के खिलाफ सदन में जमकर विरोध प्रदर्शन भी किया.
वहीं, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्रत्री उमर अब्दुल्ला ने भी कहा कि ‘सुनील शर्मा के बयान से पूरा क्षेत्र आहत हुआ है.’
क्या है पीर पंजाल?
पीर पंजाल क्षेत्र जम्मू-कश्मीर के भूगोल का अहम हिस्सा माना जाता है. इसमें हिमालय की निचली श्रेणी की पहाड़ियां हैं, जिन्हें लघु हिमालय (Lesses Himalaya) भी कहा जाता है. यह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से लेकर भारत के जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश तक फैली हैं.
पीर पंजाल कश्मीर का वो दुर्गम इलाका है, जहां के लोग पाकिस्तान के हर अटैक, हर तरह की गोलीबारी झेलने वाले फ्रंटलाइनर्स हैं. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, पीर पंजाल इलाके में सीमा के पास रहने वाले लोग हर दिन भारत की रक्षा करते हैं.
पुंछ और राजौरी का नाम ही भारत लोगों ने पाकिस्तानी सीजफायर के उल्लंघन की खबरों के जरिए ही सुना है. यही वो इलाके हैं जहां गोलीबारी, मोर्टार और बम धमाके अब आम बात है.
कश्मीर की दक्षिणी पट्टी में स्थित ये इलाका नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर पाकिस्तान की सीमा के बिल्कुल पास है. इसमें डोडा, किश्तवाड़ा और रामबन के चिनाब घाटी जिले भी आते हैं. पीर पंजाल इलाका हमेशा से पाकिस्तान की गोलीबारी का शिकार रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी पाकिस्तानी गोलीबारी में यहां के कई घर तबाह हो गए थे.
आखिर क्यों मचा बवाल?
दरअसल, बीते दिनों जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने चिनाब घाटी जिलों के साथ पीर पंजाल के लिए एक अलग प्रशासनिक प्रभाग बनाने की मांग की थी. इसके बाद ही सुनील शर्मा ने कहा कि पीर पंजाल नाम का तो कोई क्षेत्र ही नहीं है. उन्होंने कहा, ‘हमने इसका नाम किसी भी डिक्शनरी में नहीं सुना और घाटी में अलग क्षेत्रीय पहचान बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जो जम्मू-कश्मीर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक एकता के खिलाफ है और उसे चुनौती देते हैं.’
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