प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘सेवा तीर्थ’ भवन परिसर का उद्घाटन किया. इस परिसर में ही अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और कैबिनेट सचिवालय शिफ्ट हो गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन 1 और 2 का उद्घाटन किया. बता दें कि सेवा तीर्थ में PM का ऑफिस, नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट और कैबिनेट सेक्रेटेरिएट हैं.
कर्तव्य भवन-1 और 2 में फाइनेंस, डिफेंस, हेल्थ और फैमिली वेलफेयर, कॉर्पोरेट अफेयर्स, एजुकेशन, कल्चर, लॉ और जस्टिस, इन्फॉर्मेशन और ब्रॉडकास्टिंग, एग्रीकल्चर और फार्मर्स वेलफेयर, केमिकल्स और फर्टिलाइजर्स, और ट्राइबल अफेयर्स जैसे कई खास मंत्रालय हैं.
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सेंट्रल विस्टा क्या है?
नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक के 3.2 किमी लंबे क्षेत्र को सेंट्रल विस्टा कहते हैं. दिल्ली के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले पर्यटन स्थलों में शामिल इस इलाके की कहानी 1911 से शुरू होती है. उस समय भारत में अंग्रेजों का शासन था. कलकत्ता उनकी राजधानी थी, लेकिन बंगाल में बढ़ते विरोध के बीच दिसंबर 1911 में किंग जॉर्ज पंचम ने भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने का एलान किया. दिल्ली में अहम इमारतें बनाने का जिम्मा मिला एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर को. इन दोनों ने ही सेंट्रल विस्टा को डिजाइन किया. ये प्रोजेक्ट वॉशिंगटन के कैपिटल कॉम्प्लेक्स और पेरिस के शान्स एलिजे से प्रेरित था. ये तीनों प्रोजेक्ट नेशन-बिल्डिंग प्रोग्राम का हिस्सा थे.
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लुटियंस और बेकर ने उस वक्त गवर्नमेंट हाउस (जो अब राष्ट्रपति भवन है), इंडिया गेट, काउंसिल हाउस (जो अब संसद है), नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक और किंग जॉर्ज स्टैच्यू (जिसे बाद में वॉर मेमोरियल बनाया गया) का निर्माण किया था. आजादी के बाद सेंट्रल विस्टा एवेन्यू की सड़क का भी नाम बदल दिया गया और किंग्सवे राजपथ बन गया. इसका नाम भी अब कर्तव्य पथ हो गया है.
सेंट्रल विस्टा के अंदर क्या-क्या आता है?
इस वक्त सेंट्रल विस्टा के अंदर राष्ट्रपति भवन, संसद, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक, रेल भवन, वायु भवन, कृषि भवन, उद्योग भवन, शास्त्री भवन, निर्माण भवन, नेशनल आर्काइव्ज, जवाहर भवन, इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स (IGNCA), उपराष्ट्रपति का घर, नेशनल म्यूजियम, विज्ञान भवन, रक्षा भवन, वाणिज्य भवन, हैदराबाद हाउस, जामनगर हाउस, इंडिया गेट, नेशनल वॉर मेमोरियल और बीकानेर हाउस आते हैं.
सेंट्रल विस्टा रि-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में क्या होना है?
सेंट्रल विस्टा के पूरे क्षेत्र को नए सिरे से विकसित करने के प्रोजेक्ट का नाम सेंट्रल विस्टा रि-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट है. इसमें मौजूदा कुछ इमारतों में कोई बदलाव नहीं होगा तो कुछ को किसी और काम में इस्तेमाल किया जाएगा, कुछ को रिनोवेट किया जाएगा तो कुछ को गिराकर उनकी जगह नई इमारतें बनाई जाएंगी. सेंट्रल विस्टा का ही हिस्सा नई संसद भवन का निर्माण पूरा होने के बाद इसका उद्घाटन 28 मई 2023 को प्रधानमंत्री मोदी ने किया था.
कौन सी इमारतों में बदलाव होगा और किसमें नहीं होगा?
इस इलाके में स्थित छह इमारतों में इस रि-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में कोई बदलाव नहीं होगा. इनमें राष्ट्रपति भवन, हैदराबाद हाउस, इंडिया गेट, रेल भवन, वायु भवन और वॉर मेमोरियल शामिल हैं. वहीं, नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक दोनों को नेशनल म्यूजियम में बदला जाएगा. संसद की मौजूदा इमारत को पुरातात्विक धरोहर में बदल दिया जाएगा. मौजूदा जामनगर हाउस को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में बदल दिया जाएगा.
इसके साथ ही चार नई इमारतें नए सिरे से बनाने की योजना है. इसमें नए संसद भवन का निर्माण हो चुका है. इसके बाद उप-राष्ट्रपति भवन, नया सेंट्रल सेक्रेटेरिएट बनाया जाएगा. इसी सेंट्रल सेक्रेटेरिएट में सरकार के भी मंत्रालय और उनके ऑफिस शिफ्ट किए जाएंगे.
इस रि-डेवलपमेंट के लिए कुछ इमारतें गिराईं भी जाएंगी. इसमें मौजूदा नेशनल म्यूजियम, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, उप-राष्ट्रपति भवन, उद्योग भवन, निर्माण भवन, जवाहर भवन, विज्ञान भवन, कृषि भवन, शास्त्री भवन और रक्षा भवन जैसी इमारतें शामिल हैं.
इन बिल्डिंग्स का काम हुआ पूरा
नया पार्लियामेंट हाउस
इस प्रोजेक्ट के तहत पहली बिल्डिंग के तौर पर, मौजूदा स्ट्रक्चर के बगल में भारत की पार्लियामेंट के लिए एक नई तिकोने आकार की बिल्डिंग बनाई गई है. नई स्ट्रक्चर 20,866 मीटर (68,458 ft) में फैली हुई है और इसका बिल्ट-अप एरिया 694,270 sq ft (64,500 m2) है, जो चार फ्लोर में फैला है.
नई पार्लियामेंट बिल्डिंग में मौजूदा बिल्डिंग के मुकाबले ज़्यादा सीटिंग कैपेसिटी है. नए राज्यसभा हॉल में 384 सीटों की कैपेसिटी है, जबकि नए लोकसभा हॉल में 888 सीटें हैं और जॉइंट सेशन होस्ट करने के लिए 1,272 सीटों तक की एक्स्ट्रा कैपेसिटी है. इसमें डिजिटल इंटरफेस सिस्टम हैं और यह काफी कम बिजली खर्च करेगा.
सरकार का दावा है कि यह 150 साल तक चलेगी, जबकि पुराने स्ट्रक्चर को बदलकर म्यूजियम बनाने के लिए रिफर्बिश्ड किया जाएगा. टाटा प्रोजेक्ट्स ने सितंबर 2020 में ₹861.90 करोड़ (₹8619 मिलियन) की लागत से भवन के निर्माण की बोली जीती और जनवरी 2021 में निर्माण शुरू किया. इसका उद्घाटन 28 मई 2023 को हुआ.
कर्तव्य पथ
इस प्रोजेक्ट के तहत, 3 km लंबे राजपथ (जिसका नाम BJP की केंद्र सरकार ने बदलकर कर्तव्य पथ कर दिया) को ठीक किया गया और फिर से डेवलप किया गया. इसके आस-पास नहरों पर नए पुल बनाए गए, पैदल चलने वालों के लिए अंडरपास बनाए गए, चौड़े फुटपाथ बनाए गए, नई पार्किंग की जगहें बनाई गईं, पेड़-पौधे लगाए गए और बेंच भी लगाई गई. जनवरी 2021 में शापूरजी पलोनजी को सेंट्रल विस्टा एवेन्यू के रीडेवलपमेंट का टेंडर दिया गया था. उन्हें 300 दिनों के अंदर प्रोजेक्ट पूरा करना था और पूरा होने के बाद पांच साल तक इसकी देखभाल करनी थी. नए एवेन्यू का उद्घाटन 8 सितंबर 2022 को हुआ.
कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट
कर्तव्य पथ के दोनों ओर चार प्लॉट पर दस डोनट के आकार की बिल्डिंग बनाई जाएंगी, जिसमें एक यूनिफाइड सेंट्रल सेक्रेटेरिएट होगा. सभी बिल्डिंग की ऊंचाई 42 मीटर (इंडिया गेट की ऊंचाई) से कम होगी और हर बिल्डिंग में 7 मंजिलें होंगी. सभी बिल्डिंग का बाहरी हिस्सा लुटियंस स्टाइल के हिसाब से आस-पास की बिल्डिंग जैसा होगा. ग्रीन लाइन के जरिए दिल्ली मेट्रो का एक्सटेंशन कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट को कनेक्टिविटी देगा.
मौजूदा सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग में 22 मिनिस्ट्री हैं जिनमें 41,000 कर्मचारी हैं, जबकि बाकी नई दिल्ली में फैली हुई हैं. नई फैसिलिटी में ही सभी 51 मिनिस्ट्री होंगी.
इन बिल्डिंग्स का काम अभी बाकी
इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स
इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स (IGNCA) को मान सिंह रोड पर इसके मौजूदा घर से दूसरी जगह ले जाया जाएगा और एक कल्चरल जगह के तौर पर इसकी भूमिका को बढ़ाया जाएगा. जामनगर हाउस के पास 15 एकड़ का प्लॉट मौजूदा बिल्डिंग को दूसरी जगह ले जाने के लिए चुना गया है. नई बिल्डिंग में रिसर्च, पब्लिकेशन, इवेंट्स और ट्रेनिंग सेंटर के तौर पर IGNCA की मौजूदा भूमिका बनी रहेगी, साथ ही और भी सुविधाएं जोड़ी जा सकेंगी.
सेंट्रल विस्टा मेट्रो लूप लाइन
सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के हिस्से के तौर पर, सेंट्रल विस्टा लूप लाइन, दिल्ली मेट्रो की एक अंडरग्राउंड लाइन होगी जिसमें 4 स्टेशन होंगे, जिसमें मौजूदा येलो और वायलेट लाइनों का मौजूदा सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशन इंटरचेंज भी शामिल होगा. यह लूप लाइन प्रोजेक्ट में शामिल नई सरकारी इमारतों को जोड़ेगी.