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BJP के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने क्या होंगी चुनौतियां? नितिन नबीन बने हैं सबसे कम उम्र के नेशनल प्रेसिडेंट

BJP National President Nitin Nabin Challenges

नितिन नबीन को गुलदस्ता भेंट करके उनका स्वागत करते केंद्रीय मंत्री अमित शाह.

Challenges For Nitin nabin: नितिन नबीन को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है. वे BJP के 12वें और सबसे युवा अध्यक्ष हैं. 45 साल की उम्र में BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभालने वाले वे पार्टी के इतिहास में पहले नेता हैं. वहीं नितिन नबीन बेशक निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं, लेकिन उनके लिए आगे की राह इतनी आसान नही होंगी, क्योंकि उनके सामने पार्टी के वरिष्ठ एवं युवा नेताओं के साथ तालमेल बिठाने की चुनौती होगी.

इसलिए हाईकमान की ओर से पार्टी के करीब 14 करोड़ सदस्यों को, चाहे वे उनसे ज्यादा उम्र के क्यों न हों, निर्देश दिया गया है कि वे नितिन नबीन को उनकी उम्र देखकर जज न करें, बल्कि उनके साथ डील करते हुए उनके पद की गरिमा और प्रोटोकॉल फॉलो करें. उनके सामने दूसरी सबसे बड़ी चुनौती 10 साल से लगातार चल रही पार्टी के विस्तार की गति को बनाए रखने की होगी. क्योंकि साल 2029 के लोकसभा चुनाव में जीतने के लिए विस्तार होते रहना जरूरी है.

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जीत की लय को बरकरार रखना चुनौती

नितिन नबीन को मौजूदा BJP शासित राज्यों में पार्टी की जीत को बरकरार रखते हुए दक्षिण भारत में BJP की पैठ बनाने की भी चुनौती का सामना उन्हें करना पड़ेगा. क्योंकि साल 2026 में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु,पुडुचेरी, केरल और असम में विधानसभा चुनाव होने हैं और पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल में आज तक BJP सरकार नहीं बना पाई है. वहीं असम में तीसरी बार और पुडुचेरी में दूसरी बार BJP की सरकार बनाने की चुनौती भी उनके सामने है.

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कनार्टक में चल रही अंदरुनी कलह खत्म करना भी नितिन नबीन के लिए चैलेंज होगा. इसके अलावा अन्य राज्यों में भी स्थानीय नेताओं के बीच चल रहे मतभेदों को दूर करके को-ऑर्डिनेशन सुनिश्चित करना होगा. साल 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद BJP दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी है. करीब 25 राज्यों में अकेले BJP या सहयोगी दलों के साथ पार्टी सत्ता में है और बाकी बचे राज्यों में भी BJP की सरकार बनानी है.

जातिगत जनगणना सबसे बड़ी चुनौती

नितिन नबीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश में पहली बार हो रही जातिगत जनगणना भी होगी, क्योंकि इसके परिणाम देश की राजनीति को प्रभावित करेंगे. कई राज्यों में राजनीतिक समीकरण बदलेंगे. OBC और स्वर्ण जातियों की सही संख्या पता चलेगी, जिसके कारण बनने वाले नए समीकरणों के साथ BJP को तालमेल बिठाना होगा. क्योंकि पिछले कुछ सालों में देश की राजनीति जातिगत राजनीति पर फोकस हुई है.

जनगणना के बाद देश में लोकसभा और विधानसभा सीटों का परिसीमन किया जाएगा, जिसके चलते विधानसभाओं और संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होगा. ऐसे में महिलाओं के राजनीति में आने से उन्हें चुनावी जीत की ओर अग्रसर करना और महिलाओं के साथ BJP को आगे लेकर जाना चुनौती होगी. साल 2029 के लोकसभा चुनाव में भी 3 साल रह गए हैं, जिसमें जीत हासिल करना बड़ा चैलेंज होगा.

क्योंकि साल 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने कांटे की टक्कर BJP को दी थी. पार्टी 400 सीटों के लक्ष्य से चूक गई थी और सीटें 350 से भी कम थीं. उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ा झटका लगा था, क्योंकि पार्टी का विजय रथ रोक लिया गया था. 2029 का लोकसभा चुनाव नए परिसीमन और महिला आरक्षण के साथ होंगे तो नितिन नबीन को नए समीकरणों के साथ तालमेल बिठाते हुए पार्टी की जीत के लिए रणनीति बनानी होगी.


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