Rules For Parliament Members: दिल्ली में संसद का बजट सत्र चल रहा है और पहले दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अभिभाषण हुआ, जिस पर चर्चा के लिए 3 दिन 3-4-5 फरवरी तय किए गए. पहले दिन 3 फरवरी को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपनी स्पीच शुरू की, लेकिन चीन-डोकलाम का जिक्र होने के कारण BJP सांसदों ने विरोध किया. स्पीकर ओम बिड़ला ने भी राहुल गांधी को बोलने से रोका. फिर BJP-कांग्रेस सांसदों का हंगामा बढ़ता चला गया. कांग्रेस सांसदों ने राहुल गांधी को बोलने न देने का आरोप लगाया और वेल में आकर वे नारेबाजी करने लगे.
नियम उल्लंघन मामले में निलंबित हुए 8 सांसद
विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी को दौरान कांग्रेस सांसदों ने नाराजगी जताते हुए कागज फाड़कर चेयर की तरफ उछाल दिए, जिसे सदन और चेयर की गरिमा का उल्लंघन माना गया और 8 सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सांसद होने के नाते नेताओं को संसद के प्रति कुछ नियमों का पालन करना होता है. अगर वे इन नियमों का उल्लंघन करते हैं तो उन्हें सजा भी हो सकती है. संविधान के तहत कुछ धाराओं में संसद की गरिमा बनाए रखने के लिए नियम बनाए गए हैं, जिनके बारे में उन्हें सांसद बनते ही बता दिया जाता है.
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दोनों सदनों में सांसदों के लिए तय हैं ये नियम
बता दें कि सांसदों के लिए एक नियमावली बनाई गई है, जिसका पालन उन्हें सदन के दौरान करना होता है, लेकिन उल्लंघन करने पर सजा भी मिलती है. ज्यादातर मामलों में सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित किया जाता है. नियमों के अनुसार, सांसदों का सबसे पहला कर्तव्य संसद के दोनों सदनों की मर्यादा, अनुशासन बनाए रखना और दोनों सदनों का संचालन सुचारू रूप से चलाए रखना होता है, लेकिन अकसर सांसद किसी मुद्दे पर विवाद के चलते ऐसा नहीं कर पाते हैं.
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बता दें कि लोकसभा में नियम 349 में कुल 23 प्रावधान किए गए हैं, जिनके अनुसार सदन की कार्यवाही के दौरान सांसद कोई किताब जिसका सदन से संबंध नहीं, न्यूजपेपर-मैग्जीन या डॉक्यूमेंट नहीं पढ़ सकते. जब कोई सदन में अपनी बात रख रहा हो तो सांसद बीच में बोलकर बाधा नहीं डाल सकते. किसी भी तरह का शोर नहीं मचा सकते. कोई फोटो या पोस्टर नहीं दिखा सकते. नारेबाजी करना, वेल में आना, कागज फाड़कर उछालना भी सदन की गरिमा का गंभीर उल्लंघन माना जाता है.
नियम उल्लंघन पर सांसदों को क्या सजा मिलती?
बता दें कि दोनों सदनों में कार्यवाही के दौरान सांसद अगर दुव्यर्वहार या गलत आचरण करते हैं तो नियम 373 के तहत लोकसभा स्पीकर उक्त सांसद को सदन से बाहर निकाल सकते हैं. अगर सांसद स्पीकर का आदेश नहीं मानते और सदन की कार्यवाही में बाधा डालते हैं तो नियम 374 के तहत स्पीकर उन्हें निलंबित कर सकते हैं.
नियम 374(2) के तहत सांसदों को पूरे सत्र के लिए सस्पेंड किया जा सकता है. इसी तरह की स्थितियों में राज्यसभा सभापति नियम 255 और 256 के तहत सांसदों को निलंबित कर सकते हैं या सदन से निकाल सकते हैं. वहीं निलंबित होने के बाद सांसद न तो सदन में आ सकते हैं और न ही प्रश्न पूछ सकते हैं, न वोट डाल सकते हैं और न ही बहस में शामिल हो सकते हैं.
सदनों में सांसदों की अटेंडेंस के लिए ये है नियम
बता दें कि सत्र के दौरान सांसदों के लिए सदन में मौजूद रहना अनिवार्य है. साल 2026 से लोकसभा में बायोमीट्रिक अटेंडेंस शुरू हो गई है. अब सदन के बाहर रजिस्टर में एंट्री करना ही काफी नहीं होगा, बल्कि बायोमीट्रिक एंट्री भी करनी होगी. वहीं अगर सांसद समय पर नहीं आते और सदन की कार्यवाही शुरू होकर खत्म हो जाए तो सांसद को ऐबसेंट माना जाएगा और वेतन-भत्ते में कटौती हो सकती है.