देशभर में चले रहे यूजीसी के नए नियमों पर विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सवर्ण समाज में इन नियमों के लिए काफी रोष है। सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को सुनवाई करते हुए यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट का लिखित आदेश सामने आया है। इसमे कोर्ट ने केंद्र सरकार ने 5 सवाल पूछे हैं। कोर्ट ने साफ कहा है कि नए नियम अस्पष्ट हैं। इनके दुरुपयोग से इंकार नहीं किया जा सकता है। इन नियमों पर कोर्ट ने विचार के 5 मुद्दे तय किए हैं।
बता दें कि पूरा मामला तब शुरू हुआ जब यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने गत 13 जनवरी को नए नियम जारी किए। इन नियमों के तहत देशभर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को Equity Center, Equity Squad और Equity Committee बनाना अनिवार्य किया गया। बताया गया कि यह कमेटी भेदभाव से जुड़ी शिकायतें देखेंगी। कमेटी तय करेगी कि किसी के साथ गलत व्यवहार न हो।
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नियम में बताया कि कमेटी में ‘SC, ST, OBC, दिव्यांग और महिलाओं’ का प्रतिनिधि रहना जरूरी होगा। सामान्य वर्ग की अनदेखी होने से इन नियमों को लेकर सवर्ण समाज में काफी नाराजगी पैदा हो गई। सवर्ण वर्ग का आरोप है कि अन्य वर्ग इन नियमों का दुरुपयोग कर सकते हैं।
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SC ने तय किए 5 मुद्दे
1. कोर्ट ने कहा कि जब इन नियमों के clause 3(e) में भेदभाव की परिभाषा पहले से ही बहुत व्यापक और समावेशी है, तो क्या 3(c) के तहत जाति-आधारित भेदभाव को अलग से परिभाषित करना सही और तर्कसंगत है,खासकर तब जब इस तरह के भेदभाव से निपटने के लिए कोई अलग या विशेष प्रक्रिया तय नहीं की गई है।
2. क्या इन नियमों से SC, ST और OBC के अंर्तगत आने वाली सबसे ज़्यादा पिछड़ी जातियों के मौजूदा उपवर्गीकरण( sub classification) पर कोई असर पड़ेगा और क्या ये नियम इन जातियों में मौजूद सबसे पिछड़ी जातियों को भेदभाव से बचाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा देते हैं? अर्थात् SC, ST और OBC को एक साथ (पीड़ित के रूप में ) रख तो दिया गया है। लेकिन क्या SC, ST, OBC में जो सबसे पिछड़े हैं उन्हें जातीय भेदभाव से बचाने का उपाय इस रेगुलेशन में है ? मतलब अगर SC, ST, OBC के लोग अपने ही वर्ग के कमज़ोर लोगों का उत्पीड़न और भेदभाव करते हैं तो क्या होगा ?
3. सेक्शन 7(d) में हॉस्टल, कक्षा या मेंटरशिप समूह में segregation (लोगों को अलग-अलग करने की व्यवस्था) फिर चाहे वह पारदर्शी क्यों न हो , क्या इससे समानता और भाईचारे के संवैधानिक सिद्धांत का उल्लंघन नहीं होता हैं?
4. क्या रैगिंग को भेदभाव के रूप में शामिल न करना (जबकि 2012 के UGC नियमों में यह था) पीड़ितों के साथ अन्याय नहीं है? और क्या इससे संविधान के आर्टिकल 14 और 21 के तहत मिले मूल अधिकार का उल्लंघन होता है?
5. सुनवाई के दौरान अदालत के सामने आने वाला कोई दूसरा मुद्दा जिसमें कोर्ट के दखल की ज़रूरत हो।
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