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'सब देखते रहे, बचाया किसी ने नहीं…' पुलिस की 'मजाक' वाली थ्योरी पर भी भड़का एंजेल का परिवार

इस मामले में पांच लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें दो नाबालिग हैं और उन्हें किशोर सुधार गृह भेजा गया है.

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एंजेल की गर्दन और पेट में चाकू घोंपा गया था.

उत्तराखंड में त्रिपुरा के रहने वाले छात्र एंजेल चकमा की नस्लीय टिप्पणी के बाद पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. इस मामले को लेकर देहरादून पुलिस का एक बयान आया था कि हो सकता है कि वो टिप्पणी मजाक में की गई हों, जिसे एंजेल और उसके भाई ने गलत समझ लिया. अब एंजेल चकमा के चाचा का बयान आया है, जिन्होंने पुलिस की इस थ्योरी को गलत बताया है.

मोमेन चकमा ने एनडीटीवी को बताया, ‘जब वे कुछ सामान खरीदने बाजार गए थे, तो कुछ लोग, जो पहले से ही नशे में थे, ने कुछ टिप्पणियां कीं. और जब माइकल ने उनसे ऐसे न करने के लिए कहा, तो उन्होंने उस पर हमला कर दिया. फिर एंजेल उसे बचाने गया, और उन्होंने उसे पीटना और चाकू मारना शुरू कर दिया… किसी ने उन्हें बचाने की कोशिश नहीं की. उत्तराखंड पुलिस ने कहा कि यह नस्लवाद नहीं है, लेकिन यह वास्तव में नस्लवाद का मामला है.’

चकमा छात्र संघ ने भी पुलिस पर निशाना साधा है. संघ के विपुल चकमा ने कहा कि शुरू में पुलिस इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करना चाहती थी और पुलिस ने उन्हें परेशान किया था.

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एंजेल के पिता तरुण चकमा, जो मणिपुर में तैनात सीमा सुरक्षा बल के जवान हैं, ने भी यही आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि देहरादून पुलिस ने शुरू में उनकी शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया था. छात्र संघ के दबाव में 48 घंटे बाद एफआईआर दर्ज की गई थी.

बता दें, देहरादून के SSP अजय सिंह ने कहा था कि जिन टिप्पणियों पर चकमा ने विरोध जताया था, ‘वह नस्लवादी टिप्पणी की श्रेणी में नहीं आती क्योंकि एक आरोपी भी उसी राज्य का रहने वाला है.’ साथ ही कहा था कि हो सकता है कि वे टिप्पणियां ‘मजाक’ में की गई हों.

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बता दें, एंजेल चकमा और उसके भाई पर 9 दिसंबर को हमला हुआ था. स्थानीय लोगों के साथ हुआ विवाद इतना बढ़ गया था कि उन पर चाकू और दूसरे हथियारों से हमला कर दिया गया. माइकल के सिर पर वार किया गया था, जबकि एंजेल की गर्दन और पेट में चाकू घोंपा गया था.

इस मामले में पांच लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें दो नाबालिग हैं और उन्हें किशोर सुधार गृह भेजा गया है. आरोपियों में से एक, जो नेपाल का नागरिक है, घर भाग गया है. उस पर 25,000 रुपये के इनाम की घोषणा की गई है. एक पुलिस टीम नेपाल भी भेजी गई है.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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