Supreme Court Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए उम्रकैद को लेकर बड़ा फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि अगर किसी दोषी को उम्रकैद की सजा एक तय अवधि के लिए होती है, जैसे 20 साल के लिए दी गई है, तो वह अवधि पूरी होने के बाद सजायाफ्ता व्यक्ति तत्काल रिहाई का हकदार है। अगर ऐसा नहीं होता है तो हर सजायाफ्ता की जिंदगी जेल में ही खत्म हो जाएगी।
यह भी पढ़ें: ’17 जिंदा लोगों को मृत दिखाकर हटाए नाम’, बिहार SIR पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, क्या दी गई दलीलें?
कौन है सुखदेव पहलवान?
बता दें कि 23 साल के नीतीश कटारा की हत्या मामले में सुखदेव पहलवान को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, जिसके तहत सुखदेव पहलवान 20 साल जेल में बिता चुका है और मार्च 2025 में उसकी सजा पूरी हो चुकी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 29 जुलाई को सुखदेव को रिहा करने का आदेश दिया था, लेकिन सजा समीक्षा बोर्ड ने जेल में उसके आचरण और व्यवहार का हवाला दिया और उसकी रिहाई पर रोक लगा दी। इस फैसले के खिलाफ सुखदेव पहलवान ने याचिका दायर की थी, जिस पर आज 12 अगस्त को अहम फैसला आया।
यह भी पढ़ें: Explainer: क्या है तलाक-ए-हसन? सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर में तय की सुनवाई की तारीख
क्या है नीतीश कटारा हत्याकांड?
बता दें कि 16 फरवरी 2002 की रात को बिजनेसमैन नीतीश कटारा की गाजियाबाद में हत्या की गई थी और शव को जला दिया गया था। हत्याकांड के मुख्य आरोपी विकास यादव और उसका चचेरा भाई विशाल यादव था। विकास यादव राजनेता डीपी यादव का बेटा है, इसलिए केस हाई प्रोफाइल था। नीतीश का अपहरण करके हत्या इसलिए की गई थी, क्योंकि उसके विकास की बहन भारती यादव के साथ प्रेम संबंध थे।
विकास ने एक शादी में नीतीश और भारती को साथ-साथ देख लिया था। नीतीश को सबक सिखाने की ठानकर विकास और विशाल ने नीतीश का अपहरण किया। वे उसे टाटा सफारी गाड़ी में जबरन डालकर ले गए और हथौड़े से पीट-पीट कर मार दिया। नीतीश का शव गाजियाबाद से 80 किलोमीटर दूर खुर्जा में अधजली हालत में मिला था। हत्याकांड में सुखदेव पहलवान ने भी अहम भूमिका निभाई थी।
यह भी पढ़ें: मुंबई सीरियल ब्लास्ट में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, HC के आदेश पर लगाई रोक
ऐसे चली केस की सुनवाई
नीतीश की हत्या को ऑनर किलिंग मानकर केस चलाया गया। नीतीश की मां नीलम कटारा ने FIR दर्ज कराई। विकास और विशाल को मध्य प्रदेश के डबरा से गिरफ्तार किया गया। तीसरा आरोपी सुखदेव पहलवान था। 30 मई 2008 को निचली अदालत ने विकास और विशाल यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सुखदेव पहलवान को भी उम्रकैद की सजा मिली।
2 अप्रैल 2014 को दिल्ली हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। 6 फरवरी 2015 को विकास और विशाल की सजा बढ़ाकर बिना छूट के 25 साल के सश्रम कारावास की गई। 3 अक्टूबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने विकास और विशाल की 25 साल और सुखदेव पहलवान को 20 साल की सजा बरकरार रखी। 9 सितंबर 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने नीलम कटारा की फांसी की सजा की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।
संबंधित खबरें
ड्रॉफ्ट वोटर लिस्ट में नाम कटा, तो फॉर्म-6 भरकर दोबारा जुड़वा लें - EC
7 hrs ago'कक्षाएं बंद करें...', लद्दाख ने सोनम वांगचुक के स्कूल को भेजा नोटिस
7 hrs agoआर्मी और नेवी चीफ अब साउथ ब्लॉक के दफ्तर में क्यों नहीं बैठेंगे?
9 hrs ago'सेक्युलर ढांचे…', हटेगी कृषि भवन की 'कदीमी मस्जिद'; केंद्र ने HC में बताया
11 hrs agoप्रलय मिसाइल का सफल परीक्षण, 500 km मारक क्षमता; दुश्मन के लिए बड़ी चुनौती
11 hrs agoइंजीनियरिंग कॉलेज का पानी पीने से 54 छात्र बीमार, टंकी में गिरा था मरा बंदर
13 hrs agoसोमालिया के पास नौसेना ने 20 ईरानी नागरिकों को बचाया
13 hrs agoनेहा बोरा के वीडियो के जरिए BJP ने कांग्रेस को क्यों घेरा?
13 hrs agoदिल्ली-NCR की हवा बिगाड़ रहा PAK? AQI खराब करने के पीछे निकला बड़ा हाथ
13 hrs agoनौकरी की तलाश में रूस गया युवक युद्ध क्षेत्र में फंसा
14 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines