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‘हम कुत्तों से खुद सर्टिफिकेट लेकर चलने के लिए क्यों नहीं कह सकते’? स्ट्रे डॉग्स पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा कि यह बात दुनिया भर में मानी गई है कि आपके पास नसबंदी का एक असरदार सिस्टम होना चाहिए. हालांकि ये नसबंदी सिस्टम जयपुर, गोवा वगैरह में काम कर चुके हैं. पढ़िये नई दिल्ली से प्रभाकर मिश्रा की रिपोर्ट.

एक याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि जिस इलाके में मैं रहता हूं, वहां बहुत सारे आवारा कुत्ते हैं, वे पूरी रात एक-दूसरे का पीछा करते रहते हैं. मुझे नींद की बीमारी है. मेरे बच्चे पढ़ नहीं पाते, मैंने अधिकारियों से शिकायत की. उन्होंने कहा कि वे सिर्फ वैक्सीनेशन और स्टेरिलाइजेशन कर सकते हैं. मैंने NHRC को भी लिखा, कुछ नहीं हुआ. ABC नियम एक खास दायरे में काम करते हैं. कुत्तों को स्टेरिलाइजेशन या वैक्सीनेशन के लिए ले जाने पर ही उन्हें वापस छोड़ा जाएगा. लेकिन BNS कहता है कि अगर परेशानी हो रही है, तो स्थानीय अधिकारी कुत्तों को हटा सकते हैं.

एडवोकेट प्रशांत भूषण ने क्या कहा?


एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा कि यह बात दुनिया भर में मानी गई है कि आपके पास नसबंदी का एक असरदार सिस्टम होना चाहिए. हालांकि ये नसबंदी सिस्टम जयपुर, गोवा वगैरह में काम कर चुके हैं, लेकिन ज्यादातर शहरों में यह नसबंदी सिस्टम काम नहीं किया है. स्टेरिलाइजेशन से आक्रामकता कम होती है. समस्या यह है कि बहुत सारे शहरों में असरदार स्टेरिलाइजेशन नहीं हो रहा है. इसे असरदार बनाने का तरीका है इसे पारदर्शी बनाना और लोगों को जवाबदेह बनाना.

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सुप्रीम कोर्ट ने क्यों की ऐसी टिप्पणी?


एडवोकेट ने आगे कहा कि एक ऐसा सिस्टम होना चाहिए जहां लोग उन आवारा कुत्तों की रिपोर्ट कर सकें जो स्टेरिलाइज्ड नहीं लगते हैं. इसे किसी वेबसाइट पर रिकॉर्ड या रिपोर्ट किया जाना चाहिए. कुछ खास अथॉरिटी होनी चाहिए जिनकी ज़िम्मेदारी बिना स्टेरिलाइज्ड आवारा कुत्तों की शिकायत पर कार्रवाई करना होगा. प्रशांत भूषण के सुझाव पर जस्टिस मेहता ने कहा कि हम कुत्तों से खुद सर्टिफिकेट लेकर चलने के लिए क्यों नहीं कह सकते?

क्या न्यायाधीश ने किया व्यंग?


भूषण ने कहा कि कभी-कभी कोर्ट की टिप्पणियों से बुरे मैसेज जाते हैं. उदाहरण के लिए इसी कोर्ट ने कहा कि कुत्तों के काटने के लिए फीडर्स को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. जो कि शायद यह एक व्यंग्य था. जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि हमने यह व्यंग्य में नहीं कहा था. हमने यह बहुत गंभीरता से कहा था.


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