देश की शीर्ष प्रशासनिक सेवाओं में अधिकारियों की कमी का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है. केंद्र सरकार ने राज्यसभा में जानकारी दी है कि IAS, IPS और IFS सेवाओं में कुल 2830 पद खाली हैं. यह जानकारी केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा में लिखित जवाब के जरिए दी.

सरकार के मुताबिक, 1 जनवरी 2025 तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में 1300 पद, भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में 505 पद और भारतीय वन सेवा (IFS) में 1029 पद रिक्त हैं.

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स्वीकृत पदों के मुकाबले कम अधिकारी : सरकार द्वारा पेश आंकड़ों के अनुसार तीनों अखिल भारतीय सेवाओं में कुल स्वीकृत पदों की संख्या और वर्तमान तैनाती के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है.

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  • IAS के कुल स्वीकृत पद – 6877, तैनात अधिकारी – 5577
  • IPS के कुल स्वीकृत पद – 5099, तैनात अधिकारी – 4594
  • IFS के कुल स्वीकृत पद – 3193, तैनात अधिकारी – 2164

कई राज्यों में अधिकारियों की भारी कमी : कैडरवार आंकड़ों के अनुसार कई बड़े राज्यों में अधिकारियों की कमी देखी जा रही है.

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  • उत्तर प्रदेश में IAS के 652 स्वीकृत पदों के मुकाबले 571 अधिकारी तैनात हैं.
  • मध्य प्रदेश में 459 स्वीकृत पदों के मुकाबले 391 अधिकारी कार्यरत हैं.
  • महाराष्ट्र में 435 स्वीकृत पदों के मुकाबले 359 अधिकारी तैनात हैं.
  • बिहार में IAS के 359 स्वीकृत पदों के मुकाबले 303 अधिकारी मौजूद हैं.

इसी तरह IPS और IFS सेवाओं में भी कई राज्यों में पद खाली पड़े हैं, जिससे प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था से जुड़े कामकाज पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.

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आरक्षित वर्गों से भर्ती के आंकड़े भी जारी

सरकार ने पिछले पांच वर्षों (CSE 2020 से CSE 2024) के दौरान SC, ST और OBC वर्ग से सीधे भर्ती किए गए अधिकारियों का डेटा भी जारी किया है.

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  • IAS में – OBC 245, SC 135, ST 67
  • IPS में – OBC 255, SC 141, ST 71
  • IFS में – OBC 231, SC 95, ST 48

प्रशासनिक ढांचे पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि शीर्ष सेवाओं में लगातार बनी रिक्तियां प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती हैं. हालांकि, सरकार का कहना है कि UPSC के माध्यम से नियमित भर्ती प्रक्रिया के जरिए इन पदों को भरने की कोशिश जारी है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि विभिन्न सेवाओं और राज्यों में रिक्त पदों को चरणबद्ध तरीके से भरने की प्रक्रिया जारी है, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया जा सके.