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ED अधिकारियों के खिलाफ FIR पर रोक, I-PAC केस में CM ममता बनर्जी को लगा SC से बड़ा झटका

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में हर अंग स्वतंत्र रूप से अपना काम कर सके, इसलिए इस मामले की जांच जरूरी है. इस मामले में अगली सुनवाई तीन फरवरी को होगी.

बंगाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है.

I-PAC केस में सुप्रीम कोर्ट से पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा. जवाब दो सप्ताह के भीतर देना है. साथ ही छापेमारी के दौरान के CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया है. कोर्ट ने साथ ही आदेश दिया है कि ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR मामले में कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में हर अंग स्वतंत्र रूप से अपना काम कर सके, इसलिए इस मामले की जांच जरूरी है. इस मामले में अगली सुनवाई तीन फरवरी को होगी.

साथ ही कोर्ट ने कहा कि किसी भी केंद्रीय एजेंसी को किसी राजनीतिक दल के चुनावी कार्य में दखल देने का अधिकार नहीं है. वहीं, अगर केंद्रीय एजेंसियां किसी गंभीर अपराध की जांच के लिए काम कर रही हैं तो सवाल उठता है कि क्या दलगत गतिविधियों की आड़ लेकर एजेंसियों को अपने वैधानिक अधिकारों के इस्तेमाल से रोका जा सकता है?

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कोर्ट में हुई तीखी बहस

ईडी की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और बंगाल सरकार की ओर से कपिल सिब्बल कोर्ट में पेश हुए थे. दोनों वकीलों में तीखी बहस देखने को मिली. कलकत्ता हाईकोर्ट में पहले दिन की सुनवाई के वक्त के माहौल का जिक्र करते हुए सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि जब हाईकोर्ट में सुनवाई होनी थी, कोर्ट जंतर मंतर बन गया था. जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट में जो कुछ हुआ, वह चिंताजनक है. इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि आगे से ऐसा नहीं होगा.

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तुषार मेहता की दलीलें

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि राज्य के पुलिस अधिकारी राजनीतिक मालिकों के साथ धरने पर बैठ गए थे. ED के एक अधिकारी का मोबाइल फोन तक छीन लिया गया. इस तरफ की घटना से सेंट्रल फोर्सेज का मनोबल टूटेगा. राज्य की फोर्सेज को यह संदेश जाएगा कि वो अपने राजनीतिक मालिकों के साथ मिलकर कुछ भी कर सकते हैं, केंद्रीय एजेंसियों के काम को रोक सकते हैं. एक परिसर में आपत्तिजनक सामग्री पड़ी हुई थी. स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी गई थी. इसके बाद डीजीपी, मुख्यमंत्री और पुलिस आयुक्त तथा क्षेत्र के डीसीपी भारी पुलिस बल के साथ वहां पहुँचे और उस सामग्री को बिना किसी अधिकार के उठा लिया. यह चोरी का अपराध है.

कपिल सिब्बल क्या बोले?

कपिल सिब्बल ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ऊपर जो आरोप लगाया गए हैं कि वह सारे डिवाइस लेकर चली गईं, वह आरोप गलत हैं. ममता बनर्जी केवल अपना लैपटॉप और आई फोन ही ले गई थीं. साथ ही सिब्बल ने कहा कि दोपहर 12.05 बजे तक कोई जब्ती नहीं हुई थी. प्रतीक जैन के लैपटॉप में चुनाव से जुड़ी सारी जानकारी होती है. इसलिए उन्होंने लैपटॉप और निजी आईफोन लिया. बस यही लिया गया. किसी तरह की कोई बाधा नहीं डाली गई.

'चुनाव के बीच ईडी क्यों गई'

I-PAC के पास पार्टी से जुड़ी सामग्री है. इसी वजह से ईडी वहां गई. ज्यादा से ज्यादा सामग्री इकट्ठा करने के लिए ईडी की यह पूरी तरह दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई है. I-PAC पश्चिम बंगाल में चुनावों का काम करता है. 2021 में TMC और IPAC के बीच फॉर्मल कॉन्ट्रेक्ट हुआ था. सारे चुनावी डेटा गोपनीय हैं और वह सब वहीं रखा हुआ है. उम्मीदवारों के बारे में बहुत सारी जानकारी होगी. चुनाव के बीच वहां ईडी क्यों गई?

डीजीपी को हटाने की याचिका

ED ने नई अर्जी में पश्चिम बंगाल पुलिस के शीर्ष अधिकारियों को निलंबित किए जाने की मांग की है. इनमें डीजीपी राजीव कुमार भी नाम है. ED का आरोप है कि इन अधिकारियों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मिलकर जांच में बाधा डाली और सबूतों की कथित तौर पर चोरी में मदद की.


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