TrendingRepublic DayT20 World Cup 2026Donald Trump

---विज्ञापन---

गणतंत्र दिवस की 10 अनसुनी कहानियां, चौंका देंगे 26 जनवरी से जुड़े ये फैक्ट्स; बहुत से लोग आज भी अनजान

भारत आज अपना गणतंत्र दिवस गर्व से मना रहा है. लेकिन इस ऐतिहासिक दिन से जुड़ी कई ऐसी रोमांचक और अनसुनी बातें हैं, जो शायद ही आपको पता हों. आइए जानते हैं.

भारत आज अपना गणतंत्र दिवस गर्व के साथ मना रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस खास दिन के पीछे कई ऐसे गहरे राज और दिलचस्प घटनाएं छिपी हैं, जो आज भी इतिहास की किताबों में दबी रह गई हैं. 26 जनवरी की यह ऐतिहासिक यात्रा संघर्ष, भावनाओं और कुछ बेहद हैरान कर देने वाले फैसलों से भरी हुई है.

10:18 का ऐतिहासिक समय

भारत ठीक सुबह 10 बजकर 18 मिनट पर आधिकारिक रूप से एक संप्रभु गणतंत्र बना था. इसी सटीक वक्त पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली और देश का पुराना डोमिनियन स्टेटस हमेशा के लिए खत्म हो गया.

---विज्ञापन---

दोपहर में हुई पहली परेड

साल 1950 में देश की पहली गणतंत्र दिवस परेड सुबह नहीं बल्कि दोपहर 2.30 बजे आयोजित की गई थी. यह परेड राजपथ के बजाय इरविन स्टेडियम में हुई थी जिसमें 3000 जवानों और 100 विमानों ने हिस्सा लेकर दुनिया को अपनी ताकत दिखाई थी.

---विज्ञापन---

21 तोपों की सलामी का राज

गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रगान की धुन के साथ तालमेल बिठाते हुए कुल 21 तोपें दागी जाती हैं. यह परंपरा ब्रिटिश काल की शाही नौसेना से ली गई है जिसे आज हम अपने तिरंगे और राष्ट्राध्यक्ष के सर्वोच्च सम्मान के रूप में गर्व से मनाते हैं.

परेड का भटकता हुआ पता

शुरुआत में परेड का कोई एक निश्चित स्थान नहीं था और यह कभी रामलीला मैदान तो कभी लाल किले पर आयोजित होती थी. साल 1955 में पहली बार राजपथ को परेड का स्थाई ठिकाना बनाया गया जो आज देश की आन-बान और शान का केंद्र बन चुका है.

20 साल पुराना वो सपना

संविधान तैयार होने के बाद भी 26 जनवरी का इंतजार इसलिए किया गया ताकि 1930 के पूर्ण स्वराज के संकल्प को सम्मान दिया जा सके. रावी नदी के तट पर लिया गया वह संकल्प साल 1950 में गणतंत्र बनकर हमेशा के लिए भारतीय इतिहास में अमर हो गया.

बिना फीस लिखा संविधान

मशहूर कैलिग्राफर प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने पूरा संविधान अपने हाथों से लिखा और इसके लिए एक भी रुपया नहीं लिया. उनकी बस एक शर्त थी कि हर पन्ने पर उनका और आखिरी पन्ने पर उनके दादा का नाम शामिल किया जाएगा जिसे सरकार ने सहर्ष स्वीकार किया.

संविधान में कला का संगम

भारतीय संविधान के हर पन्ने को शांति निकेतन के कलाकारों ने अपनी खूबसूरत पेंटिंग्स से सजाया है. इसमें रामायण और महाभारत के दृश्यों के साथ देश के 5000 साल पुराने गौरवशाली इतिहास को कला के जरिए बड़ी बारीकी से उकेरा गया है.

हीलियम गैस में सुरक्षित पन्ने

हाथ से लिखे गए मूल संविधान को खराब होने से बचाने के लिए संसद भवन में हीलियम गैस से भरे खास बॉक्स में रखा गया है. यह गैस कागज को सड़ने से रोकती है जिससे दशकों बाद भी संविधान के पन्ने और स्याही आज भी बिल्कुल नई जैसी नजर आती है.

बारिश का वो शुभ शगुन

जब 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के सदस्य हस्ताक्षर कर रहे थे तब बाहर दिल्ली में हल्की बारिश होने लगी थी. भारतीय परंपरा में इसे बहुत शुभ माना गया और नेताओं ने इसे कुदरत का आशीर्वाद कहा कि भारत का लोकतंत्र हमेशा फलता-फूलता रहेगा.

29 जनवरी को समापन

गणतंत्र दिवस का उत्सव 26 जनवरी को खत्म नहीं होता बल्कि 29 जनवरी को बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी के साथ संपन्न होता है. विजय चौक पर सेना के बैंड जब सूर्यास्त के समय मधुर धुनें बजाते हैं तब आधिकारिक तौर पर इस राष्ट्रीय पर्व की विदाई होती है.


Topics:

---विज्ञापन---