राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपने शताब्दी वर्ष के बाद बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी में है. सूत्रों के मुताबिक, आरएसएस में संगठन के तौर पर तीन बड़े बदलाव किए जा सकते हैं. सबसे बड़ा बदलाव प्रांत व्यवस्था को लेकर हो सकता है. मौजूदा प्रांत प्रचारकों की जगह अब हर राज्य में एक राज्य प्रचारक की नियुक्ति का प्रस्ताव है. उदाहरण के तौर पर, उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जहां अभी सात प्रांत प्रचारक हैं, वहां आगे केवल एक राज्य प्रचारक होगा. पूरा राज्य में आरएसएस के काम की जिम्मेदारी राज्य प्रचारक पर ही होगी.
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वहीं, आरएसएस ने काम करने के लिए अभी पूरे देश को 11 क्षेत्रों में बांटा हुआ है. नई व्यवस्था में इन्हें घटाकर नौ किया जा सकता है. बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को एक ही क्षेत्र में शामिल करने का प्रस्ताव है. वहीं, राजस्थान को अलग क्षेत्र न रखकर उत्तर क्षेत्र में जोड़ा जाएगा.
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इसके अलावा जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करने के लिए कमिश्नरी स्तर पर संभाग प्रचारक की नई व्यवस्था लाई जा सकती है. अभी प्रांत प्रचारक होते हैं, उन्हीं की जगह पर संभाग प्रचारक नियुक्त किए जाएंगे. पूरे देश में 75 से ज्यादा संभागीय प्रचारकों की नियुक्ति का प्रस्ताव है. विभाग और जिला स्तर की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी.
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सूत्रों ने बताया कि शताब्दी वर्ष के दौरान हुए कार्यक्रमों, विचार-विमर्श और समीक्षा बैठकों से मिली फीडबैक के आधार पर ये बदलाव किए जा रहे हैं. बताया जा रहा है कि इन बदलावों को शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के खत्म होने के बाद लागू किया जा सकता है.
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बता दें, आरएसएस समय-समय पर अपनी कार्यशैली और बाकी चीजों में बदलाव करता रहता है. इससे पहले आरएसएस ने अपनी पारंपरिक ड्रेस में बदलाव किया था. 2016 में आरएसएस ने हाफ पैंट की जगह फुल पैंट को अपनाया था. इससे पहले 2010 में जैन मुनि तरुण सागर के सुझाव पर चमड़े की बेल्ट को हटा दिया गया. इसकी जगह कैनवास की बेल्ट लाई गई.
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