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'रामलला आ गए, अब इलेक्शन आएंगे'; 5 सबक, जो लोकसभा चुनाव से पहले INDIA को सीखने जरूरी

Lok Sabha Elections 2024 INDIA Alliance: लोकसभा चुनाव 2024 में अब बहुत कम समय बचा है। ऐसे में INDIA गठबंधन को पहले कुछ सबक सीख लेने चाहिएं। कुछ बातों पर ध्यान देना गठबंधन के लिए बहुत जरूरी है।

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लोकसभा चुनाव 2024 में कम समय बचा है, लेकिन INDIA गठबंधन अभी तक मजबूत नजर नहीं आ रहा है।

Lok Sabha Elections 2024 Learning Tips For Congress: अयोध्या के राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो चुकी है। अब लोकसभा चुनाव 2024 की बारी है। राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रण में उतरने की बारी है, लेकिन इससे पहले कुछ मुद्दे हैं, जिन पर सभी को ध्यान देने की जरूरत है। बजट सेशन मौजूदा भाजपा सरकार का आखिरी सेशन होगा। ऐसे में INDIA गठबंधन को सीट बंटवाने के निष्कर्ष पर जल्द पहुंचना होगा। भाजपा को भी इसका खास ध्यान रखना होगा।

 

गठबंधन में एकजुटता होना जरूरी

दूसरी ओर, जिस तरह से अयोध्या राम मंदिर को लेकर राजनीति हुई, उससे कुछ महत्वपूर्ण सबक भी भारतीय राष्ट्रीय विकास समावेशी गठबंधन (INDIA) को सीखने की जरूरत है, क्योंकि अभी तक गठबंधन एक नहीं है। पश्चिम बंगाल और पंजाब पहले ही अपना रुख क्लीयर कर चुके हैं। बाकी राज्यों का रुख क्लीयर नहीं है, ऐसे में अगर गठबंधन बिना किसी तैयारी के चुनावी रण में उतरता है तो उसे नुकसान उठाना पड़ सकता है। राहुल गांधी मैदान में हैं, लेकिन बैकअप मजबूत होना जरूरी है।

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संयोजक-अध्यक्ष में समन्वय जरूरी

चुनावी साल को देखते हुए INDIA गठबंधन को सबसे पहले अयोध्या के राम मंदिर टिप्पणियों पर रोक लगनी चाहिए। गठबंधन को एक मजबूत नारे पर काम करने पर भी ध्यान केंद्रित होना चाहिए। क्योंकि गठबंधन में कई बड़े चेहरे शामिल हैं तो ऐसे में किसी एक चेहरे पर फोकस करना आसान नहीं होगा, लेकिन संयोजक और अध्यक्ष के मुद्दे को एक मोड़ देने की जरूरत है, जो किसी भी दल तें वास्तव में काम करता है और विश्वसनीय है। यही दोनों पूरे गठबंधन को जनता के बीच स्थापित करेंगे।

 

राम मंदिर पर कांग्रेस में अंदरुनी विरोधाभास

INDIA गठबंधन में अंदरुनी विरोधाभास भी स्पष्ट हो गए हैं। कांग्रेस ने अयोध्या के राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में हिस्सा नहीं लेने का साहस दिखाया, लेकिन कांग्रेस नेताओं में ऐसा देखने को नहीं मिला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश का ऐलान किया। अपने आधिकारिक आवास को भी दीयों से रोशन किया। राज्य भर में 300 से अधिक मंदिरों में रामलला की पूजा की गई। तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी ने 100 राम मंदिर बनवाने का वादा किया।

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हिंदुत्ववादी भाजपाइयों का वोटबैंक भटक सकता

हरियाणा में कांग्रेस के दिग्गज नेता रणदीप सुरजेवाला और अन्य नेताओं ने भी राम मंदिर अयोध्या का स्वागत किया। इससे कांग्रेस के अंदरुनी गुटबाजी सामने आई, जबकि कांग्रेस हाईकमान ने राम मंदिर को भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्यक्रम बताकर इसका हिस्सा बनने से इनकार कर दिया था। वहीं पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सर्वधर्म सभा की। वे कालीघाट मंदिर में भी गईं। ऐसे में मूल हिंदुत्ववादी भाजपा का वोट कांग्रेस और उसके सहयोगियों को नहीं जाएगा।

नारा और नेतृत्व बन सकते गेमचेंजर

गठबंधन को समझना चाहिए कि राजनीति में हर मोर्चे को एक बड़े नारे की ज़रूरत होती है, जो गेम-चेंजर साबित हो सकता है। 2004 में जब अटल बिहारी वाजपेयी सरकार अजेय लग रही थी और भारत ‘चमक रहा’ था। सोनिया गांधी और कांग्रेस ने ‘कांग्रेस का हाथ, आम आदमी के साथ’ के मजबूत जवाब के साथ इसे तोड़ दिया। आज भी मोर्चे को एक मजबूत नारे की जरूरत है। केवल कॉर्पोरेट्स पर हमला करना, इस सरकार को “कॉर्पोरेट हितैषी” कहना, काम नहीं आएगा।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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