बजट 2026 में रक्षा क्षेत्र के लिए बड़ी घोषणा करते हुए सरकार ने सैन्य खर्च में लगभग 15 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी की है. अब कुल रक्षा बजट बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो पिछले साल 6.81 लाख करोड़ रुपये था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक इंटरव्यू में साफ कहा कि यह बजट भारत की तैयारी और आधुनिक जरूरतों के अनुसार सेना को सशक्त बनाने की हमारी जिम्मेदारी को दर्शाता है. हथियारों की खरीद और सेना के आधुनिकीकरण के लिए आवंटित पूंजी में भी 28 प्रतिशत की शानदार वृद्धि की गई है, जिससे उन्नत हथियार प्रणालियों की खरीद आसान होगी.
राफेल डील और स्वदेशी निर्माण पर जोर
देश की सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए भारत ने जनवरी में फ्रांस के साथ 3.25 लाख करोड़ रुपये का एक बड़ा समझौता किया है. इसके तहत 114 राफेल फाइटर जेट खरीदे जाएंगे, जो भारतीय वायुसेना के इतिहास की सबसे बड़ी खरीद में से एक है. पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि बदलते वैश्विक हालातों और सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए रक्षा क्षेत्र का आधुनिकीकरण बहुत जरूरी है. साल 2015-16 में जो रक्षा बजट 2.94 लाख करोड़ रुपये था, वह अब 7.85 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो हमारी बढ़ती सैन्य ताकत का प्रमाण है.
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आर्थिक नीतियों और व्यापार का नया दौर
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत की मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और MSME सेक्टर की वजह से ही आज देश दुनिया के 38 देशों के साथ मजबूती से फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) कर रहा है. उन्होंने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले आर्थिक कुप्रबंधन के कारण बातचीत के नतीजे नहीं निकलते थे. नई नीतियों के जरिए कपड़ा, चमड़ा और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों के छोटे व्यापारियों के लिए विदेशी बाजार के रास्ते खोले जा रहे हैं. भारत अब मजबूरी में नहीं, बल्कि पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ वैश्विक मंच पर अपनी बात रख रहा है.
निजी क्षेत्र और AI तकनीक की भूमिका
विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पीएम मोदी ने निजी क्षेत्र से रिसर्च और इनोवेशन में निवेश बढ़ाने की अपील की है. उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया और यूपीआई की सफलता के बाद अब भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने की तैयारी कर रहा है. डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग पावर बढ़ाने से युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे. प्रधानमंत्री के अनुसार, सुधारों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता अटूट है और आने वाले समय में निजी क्षेत्र की भागीदारी आर्थिक बदलाव की मुख्य धुरी बनेगी.