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Question Hour: प्रश्नकाल में पूछे गए सवाल के जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर क्या करते हैं सांसद?

Parliament Session Question Hour: संसद सत्र में प्रश्नकाल के दौरान सांसद सरकार और मंत्रियों से सवाल जवाब करते हैं। इस दौरान अकसर बहस और हंगामा भी होता है। वहीं अगर कोई सांसद सरकार या मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं होता तो नियमावली के अनुसार उसे कुछ अधिकार प्राप्त हैं।

संसद सत्र जनता के मुद्दे उठाने के मकसद से और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लगते हैं।

Question Hour Inside Story: दिल्ली में संसद का बजट सत्र चल रहा है और साल में संसद के 4 सेशन लगते हैं, जिनमें ग्रीष्मकालीन सत्र, शीतकालीन सत्र, मानसून सत्र और बजट सत्र शामिल हैं। वहीं हर सत्र के हर दिन की शुरुआत प्रश्नकाल से होती है, जिसमें सांसद उस मंत्रालय के मंत्री से सवाल पूछते हैं, जिससे संबंधित मुद्दे पर वे सवाल पूछना चाहते हैं। वहीं मंत्री पूछे गए सवाल का लिखित या मौखिक, जैसे उन्हें सही लगता है, वैसे जवाब देते हैं, लेकिन कई बार स्थिति ऐसी होती है कि सांसद मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं होते।

जवाब से संतुष्टि नहीं तो क्या करते सांसद?

अगर कोई सांसद प्रश्नकाल में पूछे गए सवाल के जवाब से संतुष्ट नहीं होते तो उन्हें मंत्री से पूरक प्रश्न पूछने का अधिकार है। इसके लिए उन्हें स्पीकर या सभापति से अनुमति लेनी होगी और कितने पूरक प्रश्न पूछे जाएंगे, यह भी स्पीकर और सभापति ही तय करेंगे। आमतौर पर सांसदों को 2 या 4 पूरक प्रश्न पूछने की अनुमति मिलती है। पूरक प्रश्न पूछकर सांसद संबंधित सवाल का जवाब और गहराई से देने की मांग करते हैं। उनकी कमियों को उजागर करते हुए कार्यप्रणाली से असंतोष जाहिर करते हैं। कई बार बहस भी हो जाती है।

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अन्य विकल्प भी होते हैं सांसदों के पास

बता दें कि सवाल के जवाब से संतुष्ट नहीं होने सांसद 30 मिनट की चर्चा की मांग कर सकते हैं। इस दौरान सांसद और मंत्रियों के बीच सवाल जवाब होते हैं। सांसद ध्यानाकर्षण या कार्य स्थगन प्रस्ताव पेश कर सकते हैं। अल्पकालिक चर्चा की मांग कर सकते हैं। अगर पूछे गए सवाल का मुद्दा विशेष हो तो वे शून्यकाल में भी मुद्दे को उठा सकते हैं। सभी तरीके आजमाने के बाद भी अगर सांसद को जवाब अधूरा और असंतुष्ट लगे तो सांसद वॉकआउट कर सकते हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में पूरक प्रश्न ही पूछे जाते हैं।

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प्रश्नकाल और शून्यकाल में क्या है अंतर?

बता दें संसद सत्रों की कार्यवाही 2 हिस्सों में डिवाइड होती है। सदन की शुरुआत प्रश्नकाल से होती है और यह प्रक्रिया 1952 से ही चल रही है। प्रश्नकाल एक घंटे का होता है, जिसके लिए 11 से 12 बजे का समय निर्धारित है। इसमें सांसद सरकार और मंत्रियों से सवाल जवाब करते हैं। वहीं सवाल पूछने के लिए 15 दिन पहले बताना होता है। दूसरी ओर, प्रश्नकल को बाद शून्यकाल शुरू होता है, जिसमें सांसद किसी मुद्दे को उठाकर उस पर चर्चा कराते हैं और सवाल जवाब होते हैं। इस दौरान ही सदन में हंगामा होता है।


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