No Confidence Motion Rules: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के पद से हटाने के लिए विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव लाने का ऐलान किया है। आज विपक्ष के प्रमुख दल कांग्रेस ने लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह को अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस भी सौंप दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में हुई INDIA ब्लॉक की बैठक में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर फैसला किया गया। वहीं लोकसभा स्पीकर ने भी महासचिव को नोटिस की जांच करके उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
इसलिए ला जा रहा है अविश्वास प्रस्ताव
बता दें कि अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष के नेता राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर दिए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर सदन में बोलने से रोकने, BJP सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ कार्रवाई शुरू नही करने, कांग्रेस की महिला सांसदों पर निराधार आरोप लगाने और 8 विपक्षी सांसदों को निलंबित करने पर स्पीकर को पद से हटाने के लिए लाया गया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि लोकसभा स्पीकर के पद को हटाने के नियम क्या हैं? स्पीकर को पद से कैसे हटाया जा सकता है? अगर नहीं तो आइए हम आपको बताते हैं…
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संविधान में है पद से हटाने का प्रावधान
बता दें कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94-C में लोकसभा स्पीकर को पद से हटाने का प्रावधान है। संविधान के अनुसार, लोकसभा के स्पीकर को पद से हटाने के लिए सदन में अविश्वास प्रस्ताव पारित कराना जरूरी है। वहीं स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की सूचना 14 दिन पहले देनी अनिवार्य है। वहीं अविश्वास प्रस्ताव पर कार्रवाई तभी की जाएगी, जब उस पर लोकसभा के करीब 50 सांसदों के हस्ताक्षर हों। अगर प्रस्ताव को 50 सांसदों का समर्थन नहीं मिला तो प्रस्ताव रिजेक्ट हो जाएगा।
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अगर अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस स्वीकार हो जाए तो उस पर चर्चा का दिन निर्धारित किया जाता है। नोटिस स्वीकार होने के बाद 10 दिन के अंदर चर्चा कराना अनिवार्य है। वहीं चर्चा के बाद अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग कराई जाती है। स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित कराने के लिए लोकसभा में मौजूद और मतदान करने वाले सांसदों का बहुमत अनिवार्य है, लेकिन सिर्फ बहुतम से काम चल जाएगा। इसके लिए संविधान संशोधन अधिनियम को पारित कराने के लिए अनिवार्य 2/3 बहुमत की जरूरत नहीं है।
विशेष उल्लेखनीय है कि जिस दिन लोकसभा स्पीकर को पद से हटाने के लिए पेश किए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी, इस दिन सदन की अध्यक्षता लोकसभा स्पीकर नहीं करेंगे, बल्कि उनकी जगह डिप्टी स्पीकर अध्यक्षता करेंगे, क्योंकि स्पीकर प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकते। दूसरी ओर, अविश्वास प्रस्ताव पास हो जाने के बाद स्पीकर को तुरंत पद छोड़ना पड़ता है, लेकिन वे सांसद बने रहेंगे। मौजूदा स्पीकर के पद से हटने के बाद नए स्पीकर को नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है।
स्पीकर को हटाने के आ चुके 3 प्रस्ताव
आजादी के बाद से आज तक लोकसभा स्पीकर के खिलाफ 3 बार अविश्वास प्रस्ताव आ चुके हैं। पहला प्रस्ताव 18 दिसंबर 1954 को तत्कालीन लोकसभा स्पीकर जी.वी. मावलंकर के खिलाफ लाया गया था, जिसे बहस के बाद सदन ने खारिज कर दिया था। दूसरा प्रस्ताव 24 नवंबर 1966 को तत्कालीन लोकसभा स्पीकर हुकम सिंह के खिलाफ लाया गया था, जिसे 50 सांसदों का समर्थन नहीं मिलने के कारण खारिज कर दिया गया था। तीसरा प्रस्ताव 15 अप्रैल 1987 को तत्कालीन लोकसभा स्पीकर बलराम जाखड़ के खिलाफ लाया गया था, जिसे बहस के बाद खारिज कर दिया गया था।