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अरावली को लेकर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, राज्यों को दो टूक-खनन के नए पट्टे की नहीं मिलेगी मंजूरी

Aravalli Hills News: अरावली की पहाड़ियों को लेकर चल रहे विवाद के बीच मोदी सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है. पर्यावरण मंत्रालय ने अरावली में नए खनन पट्टे देने पर रोक लगा दी है. साथ ही राज्यों को दो टूक वार्निंग देने हुए कहा है कि अरावली में खनन की नई मंजूरी किसी को नहीं मिलेगी. पूरे लैंडस्केप पर यह नियम समान रूप से लागू होगा.

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Aravalli Hills News: अरावली की पहाड़ियों को लेकर केंद्र सरकार ने स्पष्ट आदेश जारी कर दिया है कि अरावली में कोई नया खनन नहीं होगा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की “100 मीटर” वाली परिभाषा को लेकर अभी भी अस्पष्टता बनी हुई है. इसमें सरकार ने कहीं भी ये जिक्र नहीं किया कि परिभाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर की जाएगी. गौरतलब है कि अरावली की पहाड़ियां दिल्ली-एनसीआर से गुजरात तक फैली हैं. अवैध खनन होने के कारण अरावली पर्वत श्रृंखला को काफी नुकसान पहुंचा था. केंद्र सरकार ने अरावली पर्वत श्रृंखला में नए खनन पट्टों (Mining Leases) पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. पर्यावरण मंत्रालय ने अवैध खनन रोकने के लिए राज्यों को सख्त निर्देश दिए हैं. हालांकि, इस फैसले पर सियासत गरमा गई है.

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अरावली को लेकर जमकर चल रही सियासत

अरावली पर्वतमाला को लेकर पिछले कुछ दिनों से जमकर सियासत हो रही है. सरकार के 100 मीटर से ऊंची पहाड़ियों को ही अरावली मानने के मानक पर विवाद शुरू हुआ तो कांग्रेस ने बीजेपी को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया. आरोप है कि इससे खनन माफियाओं की नजर पहाड़ियों की तलहटी पर बने किलों और मंदिरों पर टिक गई. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद डोटासरा ने आरोप लगाया था कि अरावली की नई परिभाषा देकर भाजपा ऐतिहासिक देवस्थानों, महलों और किलों के अस्तित्व को खतरे में डाल रही है. वहीं, बीजेपी प्रवक्ता रामलाल शर्मा ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अरावली को लेकर जो परिभाषा लागू है, वह नई नहीं है.

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जानें, विवाद का असल मुद्दा क्या है?

हकीकत यह है कि 2010 से पहले ही 100 मीटर या उससे अधिक ऊंची पहाड़ियों को अरावली मानने की परिभाषा तय हो चुकी थी. इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया, जो राजस्थान के साथ-साथ दिल्ली, हरियाणा और गुजरात पर भी लागू होता है. इस परिभाषा के लिए रिचर्ड मर्फी (1968) के लैंडफॉर्म क्लासिफिकेशन को बेंचमार्क माना गया. पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि इसी वजह से अरावली आज अवैध खनन, पानी की कमी, रेगिस्तान के फैलाव और प्रदूषण से जूझ रही है. अब आरोप यह भी है कि पहाड़ियों के कटाव से ऐतिहासिक इमारतों की नींव कमजोर हो रही है, जिससे ये धरोहरें भविष्य में अस्थिर हो सकती हैं.

यह भी पढ़ें: अरावली को ‘बचाने’ नहीं ‘बेचने’ की तैयारी? गहलोत का बड़ा आरोप, बोले- केंद्र की मंशा हुई उजागर

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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