करीब एक साल से राष्ट्रपति शासन झेल रहे मणिपुर में अब राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. चार फरवरी को राज्य में नई सरकार का गठन होने की तैयारी है. सरकार गठन से पहले बीजेपी नेतृत्व ने मणिपुर विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को ऑब्जर्वर नियुक्त किया है.
दिल्ली में आज रात बीजेपी दफ्तर में मणिपुर के एनडीए विधायकों की अहम बैठक होगी. इसके बाद कल बीजेपी मुख्यालय में औपचारिक विधायक दल की बैठक बुलाई गई है, जहां नए नेता का चुनाव किया जाएगा.
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सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री पद की दौड़ में गोविंद दास और विश्वजीत सिंह के नाम सबसे आगे चल रहे हैं. बताया जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह का समर्थन मिलने के कारण गोविंद दास फिलहाल रेस में बढ़त बनाए हुए हैं. वहीं सामाजिक और जातीय संतुलन साधने के लिए एक कुकी और एक नागा समुदाय से आने वाले विधायक को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की भी चर्चा है.
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मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की दूसरी अवधि जल्द समाप्त होने वाली है. फरवरी 2025 में बीरेन सिंह सरकार के इस्तीफे के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था, जिसे अगस्त 2025 में छह महीने के लिए और बढ़ाया गया था. 60 सदस्यीय विधानसभा फिलहाल निलंबित अवस्था में है, जिसका कार्यकाल 2027 तक है.
राजनीतिक समीकरण की बात करें तो बीजेपी के पास फिलहाल 37 विधायक हैं. इसके अलावा एनपीपी के 6, एनपीएफ के 5, कांग्रेस के 5, केपीए के 2, जेडीयू का 1 विधायक और 3 निर्दलीय विधायक हैं, जबकि एक सीट रिक्त है.
हालांकि सरकार गठन की राह अभी पूरी तरह आसान नहीं मानी जा रही है. कुकी समुदाय के कुछ विधायक बिना ठोस आश्वासन के सरकार में शामिल होने को लेकर हिचक दिखा चुके हैं. कुकी नेतृत्व की ओर से यूनियन टेरिटरी विद लेजिस्लेचर की मांग भी सामने रखी गई है, जो सरकार गठन में एक अहम राजनीतिक चुनौती बन सकती है.
मई 2023 से शुरू हुई मैतेई और कुकी समुदाय के बीच हिंसा में अब तक 260 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने शांति बहाली और सामान्य स्थिति लौटाने के लिए कई कदम उठाए थे.
ऐसे में चार फरवरी को बनने वाली नई सरकार से राज्य में राजनीतिक स्थिरता और शांति बहाली की बड़ी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं.