महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव के बीच अंबरनाथ नगर परिषद अब चर्चा का केंद्र बन गई है. जब भी महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों की बात होती है, तो एशिया के सबसे अमीर नगर निकायों में से एक होने की वजह से अक्सर बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ही सुर्खियों में रहता है. लेकिन इस बार, अंबरनाथ नगर परिषद ने मुंबई को कड़ी टक्कर दी है. यह दिखाया है कि शिवसेना और एनसीपी के दो-दो धड़ों में बंटने के बाद राज्य की राजनीति कितनी जटिल हो गई है.
पहला बड़ा उलटफेर मंगलवार को हुआ, जब 60 सदस्यीय परिषद में भाजपा ने सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी अपनी सहयोगी शिवसेना (एकनाथ शिंदे) को सत्ता से बाहर रखने के लिए कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया है. इसमें अजीत पवार की एनसीपी ने भी मदद की, जो राज्य स्तर पर तो सहयोगी है, लेकिन बीएमसी सहित कई जगहों पर भाजपा और शिंदे सेना ने उसे गठबंधन से बाहर रखा है.
यह भी पढ़ें : महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव में BJP के साथ गठबंधन करने पर गिरी गाज, कांग्रेस ने ब्लॉक अध्यक्ष को किया सस्पेंड
भाजपा-कांग्रेस के इस गठबंधन ने दोनों पार्टियों में हड़कंप मचा दिया. जहां कांग्रेस ने अंबरनाथ इकाई को भंग कर दिया और 12 नेताओं को निलंबित कर दिया. वहीं, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपनी पार्टी को कांग्रेस से संबंध तोड़ने का निर्देश देते हुए कहा कि ऐसा गठबंधन स्वीकार्य नहीं है. उद्धव ठाकरे और संजय राउत ने भी भाजपा के “कांग्रेस मुक्त भारत” के नारे पर तंज कसते हुए इसे “दोहरा मापदंड” बताया.
फिर आया नया मोड़
शुक्रवार को समीकरण फिर बदल गए. अजीत पवार गुट के चार पार्षदों ने भाजपा के नेतृत्व वाले ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ से समर्थन वापस ले लिया और एकनाथ शिंदे की शिवसेना को समर्थन देने का फैसला किया. जिन 12 पार्षदों को कांग्रेस ने निलंबित किया था, वे भी भाजपा में शामिल हो गए. शिंदे की शिवसेना के पास पहले से ही 27 पार्षद थे, जो बहुमत से केवल चार कम थे. एनसीपी के पार्षदों और एक निर्दलीय के समर्थन से शिंदे गुट ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है.
यह भी पढ़ें : महाराष्ट्र में बहुमत के लिए BJP का अनोखा दांव, अंबरनाथ में कांग्रेस तो अकोला में ओवैसी का लिया समर्थन
एनसीपी पार्षदों का कहना है कि वे कांग्रेस के साथ सत्ता साझा करने में सहज नहीं थे. साथ ही, स्थानीय नेताओं का मानना है कि जनता का जनादेश ‘महायुति’ के लिए था, न कि कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए. इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण के लिए एक झटके के रूप में देखा जा रहा है, जिन्होंने कथित तौर पर कांग्रेस के साथ गठबंधन की योजना बनाई थी.
संबंधित खबरें
जंतर-मंतर को प्रोटेस्ट साइट के तौर पर हटाने का आदेश किसने दिया?: दिल्ली HC
31 mins agoसौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर में घुसना पड़ा भारी, FIR दर्ज
2 hrs ago'देश की जनता PM के साथ', SIR विवाद पर अमित शाह ने राहुल गांधी को दिया जवाब
4 hrs ago'ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा हमारा मिशन', मीटिंग के बाद राहुल गांधी का ऐलान
5 hrs ago'लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा', चीन के दावे पर MEA का करारा जवाब
5 hrs agoएल मुरुगन ने केंद्रीय मंत्री पद और राज्यसभा से दिया इस्तीफा, सामने आई वजह
5 hrs agoहाई टी में शामिल होने पहुंचे कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला का बड़ा बयान
6 hrs agoसऊदी अरब के 4 एयरपोर्ट्स के लिए एयर इंडिया-इंडिगो की सभी उड़ानें रद्द
7 hrs ago'CEC को मंत्री-गवर्नर बनाया…', पीयूष गोयल ने कांग्रेस पर साधा निशाना
7 hrs ago'फोन छीने, वकीलों को मिलने नहीं दिया...', CJP ने दिल्ली पुलिस पर लगाए आरोप
7 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines