नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) से ठीक पहले एक बार फिर किसानों ने अपनी कई मांगो के साथ ‘दिल्ली चलो’ के नारे को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। पंजाब हरियाणा के किसान 13 फरवरी को दिल्ली पहुंचने के लिए कूच कर रहे हैं। इस कारण दिल्ली की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। हरियाणा-पंजाब की सीमाएं सील करने के साथ कई जिलों में इंटरनेट बंद किया गया है। किसानों के प्रदर्शन का असर दिल्ली, पंजाब-हरियाणा से लेकर यूपी में हो रहा है। हालांकि, ये पिछले किसान आंदोनल से काफी हद तक अलग है।
कानूनों का विरोध
पिछला आंदोलन कानूनों के विरोध में था। किसानों ने तीन कृषि सुधार कानूनों को लेकर आंदोलन छेड़ा था, जो धीरे-धीरे काफी उग्र हो गया था। इसमें पंजाब, हरियाणा के सरकारों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ था। हालांकि, किसानों ने सरकार को झुका दिया और केंद्र ने कानून वापस ले लिया था। इस बार किसान मुख्य रूप से कर्ज माफी, बिजली बिल के साथ MSP की गारंटी के लिए आंदोलन कर रहे हैं।
https://twitter.com/Prince_jatt99/status/1756854318748320228
किसान संगठनों का साथ
अभी के आंदोलन में दावा किया जा रहा है कि 200 से अधिक किसान संगठन साथ-साथ हैं। हालांकि, अभी देशभर में इसका असर देखने को नहीं मिल रहा है। ऑल इंडिया किसान सभा ने अभी इससे दूरी बनाकर रखी है। इस कारण अभी इस आंदोलन का असर हरियाणा-पंजाब-दिल्ली की सीमाओं के साथ उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रहा है। हो सकता है कि आंदोलन के खिंंचने पर इसमें और लोग जुड़ें और इसका असर व्यापक हो।
ये भी पढ़ें: चौधरी चरण सिंह, MS स्वामीनाथन को भारत रत्न के बीच क्यों आंदोलित हैं किसान?
कानून बनाने की मांग
पिछले किसान आंदोलन को देखा जाए तो वो मुख्य रूप से किसान कानून यानी तीन कृषि सुधार कानूने की खिलाफत में था। लेकिन, इस बार का आंदोलन कई मांगों के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी यानी इसपर कानून की मांग पर है।
https://twitter.com/SachinGuptaUP/status/1756756245250269695
चुनाव में क्या होगा असर
अगले कुछ महीनों में देश में लोकसभा के चुनाव होने जा रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि किसान केंद्र सरकार पर दबाव डालने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि चुनाव से पहले सरकार झुकेगी और उनकी मांगों को माना जाएगा। लेकिन, सरकार ने मांग मानने और समझौता करने में देरी की तो पूरी संभावना है कि आंदोलन लंबा खिंंचे । अगर ऐसा होता है तो धीरे-धीरे आंदोलन राष्ट्रव्यापी हो जाएगा और चुनावों में भाजपा को तगड़ा नुकसान होगा. क्योंकि, आचार संहिता के बाद सरकार के पास, करने को कुछ खास नहीं रहेगा।
ये भी पढ़ें: सरकार के खिलाफ फिर हुंकार भरेंगे किसान, राकेश टिकैत का क्या है प्लान?
संबंधित खबरें
'आप विदेशी मदद से PM बने', राहुल का PM मोदी पर पलटवार, खुली बहस की चुनौती
1 hr agoओडिशा में किसानों पर दोहरी मार, अर्नब के बाद मुरासु साइक्लोन का खतरा
2 hrs ago'हवाई सफर मत करें', प्लेन के किराये में भारी बढ़ोतरी पर SC की दो टूक
5 hrs agoदिवाली पर ग्रीन पटाखे फोड़ने की SC ने दी मंजूरी; घंटे भी किए फिक्स
5 hrs agoआजम खान को SC से तगड़ा झटका, ED की गिरफ्तारी पर तुरंत सुनवाई से इनकार
5 hrs agoक्या स्टिंग ऑपरेशन करना भारत में है कानूनी, क्या कहता है सुप्रीम कोर्ट?
5 hrs agoकितनी तैयार भारत की पहली बुलेट ट्रेन, नॉर्मल से अलग क्यों होते हैं ट्रैक?
6 hrs agoआंध्र प्रदेश के 12 बूथों पर दोबारा मतदान, चुनाव आयोग का फैसला
6 hrs agoनौसेना के लिए 53,866 करोड़ रुपये की डील, राजनाथ बोले-5 करोड़ रोजगार के मौके
7 hrs agoअयोध्या राम मंदिर में दान चोरी पर SC में खुलासा, UP सरकार ने बताया-दोषी कौन
7 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines