इंदौर के भागीरथपुरा इलाके की एक दर्दनाक कहानी सामने आई है, जहां एक परिवार में 15 साल के लंबे इंतजार के बाद पोते का जन्म हुआ था. लेकिन वहां के दूषित पानी ने परिवार की सारी खुशियां छीन लीं. पहले 70 साल की दादी उर्मिला यादव और फिर उनकी तेरहवीं खत्म होते ही उनके पति अल्घुराम यादव की गंदा पानी पीने से मौत हो गई.
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, 28 दिसंबर को उर्मिला यादव की उल्टी और दस्त की वजह से निधन हो गया. उनकी शोक की रस्में खत्म हुईं और उनके पति अल्घुराम यादव बीमार पड़ गए. गुरुवार रात अस्पताल में करीब एक महीने तक भर्ती रहने के बाद उनकी भी मौत हो गई. अल्घुराम यादव को 9 जनवरी को उल्टी और दस्त होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि उन्हें पहले से ही लकवा, दाहिनी जांघ की हड्डी में फ्रैक्चर समेत दूसरी बीमारियां थी. लेकिन परिवार का दावा है कि वे 8 जनवरी तक बिल्कुल सही थे.
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उर्मिला के बीमार होने से ग्यारह महीने पहले परिवार में पंद्रह साल के इंतजार के बाद बच्चे का जन्म हुआ था. उर्मिला पहली बार दादी बनी थीं. उन्हें अपने पोते के
साथ मुश्किल से आठ से दस महीने मिले. एक शाम उन्हें उल्टी हुई, अगली सुबह वह आईसीयू में थीं और रविवार को निधन हो गया.
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परिवार का आरोप है कि अल्घुराम की मौत के बाद, हमें बताया गया कि अन्य बीमारियां की वजह से उनका निधन हो गया. परिवार का कहना है कि प्रशासन झूठ बोल रहा है, अगर ये सच है तो सरकार ने लाखों रुपये के अस्पताल के बिल क्यों चुकाए?
उर्मिला की मौत के बाद परिवार को रेड क्रॉस सोसाइटी से 2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मिली.
उर्मिला की मौत के तीसरे दिन 31 दिसंबर को तबीयत खराब होने पर पोते को भी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उसे इलाज के बाद घर ले आया गया.
आंकड़े छिपाने का आरोप
भागीरथपुरा के लोगों ने सरकार पर मौत के आंकड़े छिपाने का आरोप लगाया है. लोगों का कहना है कि दूषित पानी की वजह से 33 लोगों की मौत हुई है, जबकि सरकार ने यह आंकड़ा 21 बताया है.