देश में तेज और आधुनिक रेल सेवा के रूप में प्रचारित वंदे भारत ट्रेनों के किराए और उनकी वहन क्षमता को लेकर लोकसभा में बुधवार को अहम सवाल उठे. यह मुद्दा सांसद चंद्रशेखर ने उठाया, जिस पर रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विस्तृत जवाब देते हुए कहा कि वंदे भारत ट्रेनों का किराया सेवा लागत से कम रखा गया है और इन ट्रेनों की यात्री मांग लगातार बढ़ रही है.
सांसद चंद्रशेखर ने सरकार से पूछा कि वर्ष 2025-26 के दौरान वंदे भारत ट्रेनों का किराया ढांचा क्या है, प्रमुख मार्गों पर एसी चेयर कार और एग्जीक्यूटिव क्लास के औसत किराए क्या हैं तथा इन ट्रेनों की ऑक्यूपेंसी दर क्या है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी सवाल किया कि वंदे भारत ट्रेनों को लेकर यह आलोचना हो रही है कि इनका किराया मध्यम और निम्न आय वर्ग के यात्रियों के लिए महंगा है.
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रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने जवाब में बताया कि भारतीय रेलवे अलग-अलग वर्गों के यात्रियों के लिए कई तरह की ट्रेन सेवाएं संचालित करता है, जिनमें मेल और एक्सप्रेस, अमृत भारत, वंदे भारत, वंदे भारत स्लीपर, नमो भारत रैपिड रेल, तेजस, हमसफर, राजधानी, शताब्दी, दुरंतो और गरीब रथ जैसी ट्रेनें शामिल हैं. उन्होंने कहा कि किराया तय करते समय सेवा की लागत, यात्रियों को मिलने वाली सुविधाएं, अन्य परिवहन साधनों से प्रतिस्पर्धा तथा सामाजिक-आर्थिक पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है.
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रेल मंत्री ने बताया कि फरवरी 2019 में शुरू की गई वंदे भारत ट्रेन सेवाएं जनवरी 2026 तक देश के 82 रूटों पर 164 सेवाओं तक विस्तार कर चुकी हैं. इन ट्रेनों में आधुनिक सस्पेंशन सिस्टम, तेज रफ्तार और तेजी से गति पकड़ने की क्षमता, ऑटोमैटिक प्लग डोर, आरामदायक सीटें, मिनी पैंट्री, सीसीटीवी निगरानी और कवच सुरक्षा प्रणाली जैसी सुविधाएं दी गई हैं.
किराए के मुद्दे पर सरकार ने आंकड़ों के जरिए अपनी स्थिति स्पष्ट की. रेल मंत्री ने बताया कि 300 से 400 किलोमीटर की दूरी के लिए वंदे भारत एसी चेयर कार का किराया औसतन लगभग 2.19 रुपये प्रति यात्री प्रति किलोमीटर है. उन्होंने कहा कि यह किराया चीन, जापान और फ्रांस जैसे देशों की समान श्रेणी की हाई स्पीड रेल सेवाओं के मुकाबले काफी कम है, जहां यह 7 रुपये से 20 रुपये प्रति किलोमीटर तक है.
सरकार ने यह भी बताया कि भारतीय रेलवे के सामान्य श्रेणी के किराए पड़ोसी देशों की तुलना में भी कम हैं. जहां भारत में न्यूनतम किराया लगभग 0.20 रुपये प्रति यात्री प्रति किलोमीटर है. वहीं, पाकिस्तान में यह लगभग 0.54 रुपये, बांग्लादेश में 0.37 रुपये और श्रीलंका में करीब 0.51 रुपये प्रति किलोमीटर है.
रेल मंत्री ने सदन को बताया कि वंदे भारत ट्रेनों को लेकर यात्रियों में जबरदस्त मांग देखने को मिल रही है. उन्होंने कहा कि देश के प्रमुख मार्गों पर इन ट्रेनों की ऑक्यूपेंसी लगभग 100 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो यात्रियों की बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाती है.
सरकार ने रेलवे के सामाजिक दायित्व पर भी जोर दिया. रेल मंत्री ने बताया कि भारतीय रेलवे हर वर्ष 720 करोड़ से अधिक यात्रियों को सेवा प्रदान करता है. वित्त वर्ष 2023-24 में यात्रियों को कुल 60,466 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई, जो कुल किराए पर लगभग 45 प्रतिशत सब्सिडी के बराबर है. उन्होंने कहा कि यदि रेलवे को किसी सेवा पर 100 रुपये खर्च करने पड़ते हैं तो यात्रियों से औसतन 55 रुपये ही वसूले जाते हैं.
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि वंदे भारत ट्रेनों में सामान्य किराए पर कोई विशेष रियायत नहीं दी जाती है. इसके बावजूद सामाजिक समावेशन को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक वंदे भारत ट्रेन की चेयर कार में दिव्यांग यात्रियों के लिए चार सीटों का आरक्षित कोटा रखा गया है.
सरकार ने कहा कि किराया नीति तय करते समय अंतरराष्ट्रीय मानकों और सार्वजनिक परिवहन को समावेशी बनाने से जुड़ी वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को भी ध्यान में रखा जाता है.
लोकसभा में उठे इस मुद्दे के बाद यह साफ हो गया है कि वंदे भारत ट्रेनों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इनके किराए को लेकर बहस भी जारी है. सरकार जहां इन ट्रेनों को आधुनिक और किफायती सेवा बता रही है, वहीं आलोचक इसे आम यात्रियों की पहुंच से बाहर मानते हैं. आने वाले समय में वंदे भारत ट्रेनों के विस्तार के साथ यह बहस और तेज होने की संभावना है.