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पाकिस्तान से 90 किलोमीटर दूर भारतीय सेना का बड़ा युद्ध अभ्यास, जानिए क्या है 'ऑपरेशन त्रिशूल'?

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T-90 टैंक

Operation Trishul: देश की राजधानी दिल्ली में दिल दहला देने वाली घटना घटी थी. कार में विस्फोटक रखकर ब्लास्ट की घटना को अंजाम दिया गया. जिसमें 10 से अधिक लोगो की मौत और कई घायल बताए हुए थे. भारत की तीनों सेना बहुत जल्द कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस समारोह को लेकर अभ्यास शुरु करने जा रही थी. ब्लास्ट की घटना के बाद तीनों सेना यानी भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना ने अपनी ताकत दिखाने के लिए पाकिस्तान से महज 90 किलोमीटर की दूरी पर यानी जैसलमेर में एक बड़ा युद्द अभ्यास करके अपना दमखम दूश्मन देश को दिखाया है. भारत की तीनों सेना ने अपने इस युद्द अभ्यास का नाम दिया है ‘त्रिशुल’. बता दे कि ऑपरेशन त्रिशूल के जरिए थल से लेकर आसमान तक भारतीय सेना ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया है.

जैसलमेर में ‘ऑपरेशन त्रिशूल’

भारतीय हथियार, तोप और फाइटर प्लेन की गूंज पाकिस्तान में जरुर सुनाई दिया होगा. रेगिस्तान में टैक से उगलते खतरनाक गोले, आसमान में फाइटर जेट की गूंज से पूरा मरुस्थल हिल गया है. बता दे कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही भारतीय सेना लगातार अपनी ताकत में इजाफा करते आ रही है. दिल्ली में हुए ब्लास्ट के बाद सभी इंटरनेश्नल बॉडर पर हाई अलर्ट कर दिया गया है. न्यूज 24 ने जब सेना के एक मेजर जनरल से यह सवाल किया कि इस अभ्यास का क्या मकसद है तो उन्होने बताया कि ‘किसी भी माहौल और किसी भी इंटरनेशनल बॉडर पर एक साथ हमले करने की अपनी तैयारियों का समीक्षा करना है. ऑपरेशन त्रिशूल के जरिए भारतीय सेना युद्द की नई रणनितियों को धार देने में जुटी हुई है. इस युद्द अभ्यास में टी 90 टैंक का इस्तेमाल किया जा रहा है.

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क्या है T-90 टैंक की खासियत?

T-90 टैंक आम रास्ते पर लगभग 60 किलोमीटर की रफ्तार से भगाया जा सकता है, लेकिन अगर रास्ता खराब है तो इस टैक की रफ्तार लगभग 50 किलोमीटर के आसपास ही सेना रखती है. यह टैक पूरी तरह से रूस से बना हुआ है. इसे कही भी आसानी से ले जाया जा सकता है. दुश्मन से बचाव के लिए T90 टैंक में Kaktus K-6 एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर होता है. टी 90 टैंक के अलावा ऑपरेशन त्रिशुल में अपाचे हेलिकॉप्टर का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.

अपाचे हेलिकॉप्टर की खासियत

अमेरिका में बना अपाचे हेलिकॉप्टर दुश्मन के ठिकानों को आसानी से भेद सकता है. भारतीय सेना को अमेरिका से तीन AH-64E अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर की पहली खेप जून 2025 में हिंडन एयरबेस पर मिली थी. अपाचे की मारक क्षमता का तोड़ तो दुश्मन देश के पास भी नहीं है. ये हेलफायर मिसाइल, हाइड्रो रॉकेट और स्टिंगर मिसाइल से लैस हैं. साथ ही इनमे लगी 30 मिमी की चेन गन 1,200 राउंड गोला बारूद से एक साथ हमला कर सकती है. इन हेलीकॉप्टरों में 360 डिग्री कवरेज वाला रडार, टारगेट एक्विजिशन सिस्टम और नाइट विज़न कैमरे लगे हैं. जो दिन और रात दोनों वक्त दुश्मन को सटीक निशाना बना सकते हैं.

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