भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के कड़े तेवरों और बालाकोट 2.0 के संकेतों ने पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व की नींद उड़ा दी है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच पाकिस्तान खुद को सबसे असुरक्षित महसूस कर रहा है. सूत्रों के मुताबिक फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने इस डर के चलते एक हाई-लेवल इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है, जिसमें आईएसआई प्रमुख और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार समेत सेना के तमाम दिग्गज शामिल हुए. भारत द्वारा पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी अड्डों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक किए जाने के बाद से मुनीर और उनकी टीम को किसी बड़े सैन्य एक्शन का डर सता रहा है.
पाकिस्तानी सेना हाई अलर्ट पर क्यों?
असीम मुनीर ने अपने वरिष्ठ कमांडरों और खुफिया एजेंसियों को हर वक्त हाई अलर्ट पर रहने का सख्त निर्देश दिया है. आईएसआई चीफ को जिम्मेदारी दी गई है कि वे ईरान, सऊदी अरब, यूएई और अमेरिका जैसे देशों के साथ कूटनीतिक संपर्क बढ़ाएं ताकि युद्ध जैसी स्थिति का आकलन किया जा सके. पाकिस्तान को सबसे बड़ा डर यह है कि अमेरिका ईरान पर हमले के लिए उसके एयरबेस की मांग कर सकता है, जिसे मना करना मुनीर के लिए मुमकिन नहीं होगा. अपनी सुरक्षा चुनौतियों से घिरा पाकिस्तान इस वक्त दोहरे दबाव में है, जहाँ एक तरफ भारतीय सेना की हुंकार है और दूसरी तरफ अमेरिका की रणनीतिक मांगें.
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पाकिस्तान को कट्टरपंथी मौलवियों का सहारा
बाहरी खतरों से घबराई पाकिस्तानी सेना ने अब देश के भीतर कट्टरपंथी मौलवियों और धार्मिक विद्वानों को एकजुट करना शुरू कर दिया है. नेशनल पैगाम ए अमन कमेटी के तहत सैन्य मुख्यालय में हुई एक गुप्त बैठक में धार्मिक नेताओं से राष्ट्रीय सुरक्षा पर साझा सोच बनाने को कहा गया है. गौर करने वाली बात यह है कि ये वही मौलवी हैं जो सीमा पार आतंकी कैंपों में जिहादी तैयार करने का काम करते हैं. भारतीय सेना प्रमुख की धमकी के बाद पाकिस्तान अब न केवल अपनी सेना बल्कि इन कट्टरपंथियों और आतंकियों को भी सक्रिय कर रहा है ताकि देश के भीतर किसी भी तरह के विरोध को दबाया जा सके.
ईरान संकट और घरेलू अस्थिरता का गहराता खतरा
पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चिंता उसकी ईरान के साथ लगती सीमा और देश की आंतरिक शिया आबादी है, जो कुल जनसंख्या का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा है. अधिकारियों को डर है कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो पाकिस्तान में शिया समुदाय अमेरिका और इजरायल के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर सकता है. डूरंड लाइन पर अफगानिस्तान के साथ पहले से जारी तनाव के बीच पाकिस्तान एक और अस्थिर सीमा का बोझ नहीं उठा सकता. सऊदी अरब और तुर्की जैसे देशों के जरिए अमेरिका को समझाने की कोशिशें भी फेल होती दिख रही हैं, जिससे पाकिस्तान को आने वाले समय में गंभीर रणनीतिक और राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं.
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