भारत ने बांग्लादेश में सुरक्षा स्थितियों के मद्देनजर एक सतर्क कदम उठाते हुए वहां तैनात अपने राजनयिक मिशन और दूतावासों के परिजनों को देश वापस लौटने का सलाह दे दी है. विदेश मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से एएनआई ने बताया कि यह फैसला मौजूदा अस्थिर हालात को देखते हुए सावधानीपूर्ण उपाय के तौर पर लिया गया है, हालांकि भारतीय मिशन और सभी दूतावास पूरी तरह चालू और एक्टिव मोड पर वर्किंग हैं.
भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में आई खटास
गौरतलब है कि जुलाई 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से भारत और बांग्लादेश के रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं. इस बीच पड़ोसी मुल्क में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ी हिंसा ने भारत सरकार को और भी चिंतित कर दिया है. साथ ही भारत-विरोधी विचारधारा और सीमा पर घुसपैठ की घटनाओं ने सुरक्षा चिंता में इजाफा किया. दिसंबर 2025 में भारत ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त को तलब कर इन मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाया था.
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भारत ने जाहिर की चिंता
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर हमलों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायस्वाल ने 9 जनवरी को राजधानी दिल्ली में विकली ब्रीफिंग में इस बात पर चिंता जाहिर की थी कि बांग्लादेश में बार-बार होने वाली ऐसी घटनाओं का पैटर्न चिंताजनक है. उन्होंने कहा कि चरमपंथी तत्वों द्वारा अल्पसंख्यकों, उनके घरों और प्रतिष्ठानों पर हमले जारी हैं, जिन्हें व्यक्तिगत दुश्मनी या अन्य बहानों से कमतर आंकने की प्रवृत्ति खतरनाक है.
एक महीने में 3 हिंदुओं की हत्या
उन्होंने आगे कहा कि इससे अपराधियों का हौसला बढ़ता है और समुदाय में भय का माहौल गहरा जाता है. इस महीने ही तीन से अधिक हिंदूओं की हत्या हो चुकी है. इस बीच भारत की राजनयिक परिवारों को वापस बुलाने की कार्रवाई बांग्लादेश में संभावित बड़े उथल-पुथल का संकेत मानी जा रही है. पड़ोसी देश में आंतरिक कलह के बीच भारत लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है.