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कैसे बदलता है किसी मेट्रो स्टेशन का नाम? DMRC या CM किसकी कितनी भूमिका

दिल्ली में एक बार फिर मेट्रो स्टेशन का नाम बदला गया है। मयूर विहार पॉकेट-1 मेट्रो स्टेशन को अब श्री राम मंदिर मयूर विहार के नाम से जाना जाएगा। इसके लिए एसएसए ने सिफारिश की थी। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

दिल्ली में अभी तक पीतमपुरा, हुड्डा सिटी सेंटर, बदरपुर, ओखला, तुगलकाबाद, मुकुंदपुर जैसे कई मेट्रो स्टेशन के नाम बदल चुके हैं। बीते दिन मयूर विहार पॉकेट 1 का नाम भी बदलकर श्री राम मंदिर मयूर विहार रख दिया गया है। नाम बदलने की खबरों के बीच कभी आपके दिमाग में आता होगा कि मेट्रो स्टेशन का नाम आखिर बदलता कौन है? क्या यह अधिकार दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (DMRC) के पास है या दिल्ली की सीएम किसी मेट्रो स्टेशन का नाम बदल सकती हैं। आइए विस्तार से समझते हैं।

पिंक लाइन पर स्थित मयूर विहार पॉकेट-1 मेट्रो स्टेशन का नाम अब श्री राम मंदिर मयूर विहार हो चुका है। स्टेशन पर नए नाम की पट्टिका भी लग चुकी है। बताया जा रहा है कि मयूर विहार पॉकेट-1 और फेज-1 दो स्टेशनों के एक जैसे नाम होने से यात्रियों में काफी भ्रम होता था। पॉकेट-1 के पास श्री राम मंदिर है। इससे चलते श्री सनातन धर्म सभा ने इस पॉकेट-1 स्टेशन का नाम बदलकर श्री राम मंदिर के ऊपर रखने की मांग सीएम रेखा गुप्ता और डीएमआरसी से कई थी। कई बार मांग होने पर इस स्टेशन का नाम बदल दिया गया। SNA की सिफारिशों पर मेट्रो स्टेशन का नाम बदला गया।

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मेट्रो का नाम बदलने के लिए का अधिकार स्टेट नेम्स अथॉरिटी (SNA) का होता है। यह सीधे शहरी विकास विभाग के तहत काम करती है। इसमें 29 सदस्य होते हैं। इसकी अध्यक्षता दिल्ली के मुख्यमंत्री करते हैं। यह अथॉरिटी दिल्ली में सड़कों, पार्कों, कॉलोनियों, इमारतों और अन्य नागरिक बुनियादी ढांचे के नामकरण या पुन: नामकरण से संबंधित फैसले लेने के लिए अधिकृत होती है। इसमें दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव उपाध्यक्ष के रूप में काम करते हैं।

किसका नाम नहीं बदल सकते?

स्टेट नेम्स अथॉरिटी (SNA) की समिति NCT दिल्ली में सभी ऐसी सड़कों, पार्कों, कॉलोनियों और भौगोलिक संस्थाओं का नामकरण करती है, जो MCD और NDMC के अधीन नहीं हैं। यह समिति स्थानों के नाम रखना, बदलना के अलावा मूर्तियां स्थापित करने के प्रस्तावों को मंजूरी देती है।

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