जब देश स्पेस मिशन भेज रहा था, पहाड़ों को चीरकर हाईवे बना रहा था और शहरों को एक्सप्रेसवे से जोड़ रहा था, उस दौरान भी हिमाचल प्रदेश का एक छोटा से गांव सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए आजादी के 78 साल तक तरसता रहा. मंडी ज़िले के चवासी क्षेत्र में स्थित तुम्मुन गांव के लिए यह सोमवार किसी त्यौहार से कम नहीं था. ऐसा इसलिए क्योंकि पहली बार यहां तक वाहन चलने लायक सड़क पहुंची और उसके साथ ही सरकारी बस भी.
2.7 किलोमीटर लंबी सड़क तैयार
लोक निर्माण विभाग ने शकेल्ड से तुम्मुन तक करीब 2.7 किलोमीटर लंबी सड़क तैयार की है. इस सड़क की वजह से दुर्गम पहाड़ी गांव अब मुख्य सड़क नेटवर्क से जुड़ गया है. दशकों से पैदल रास्तों और कच्ची पगडंडियों पर निर्भर रहने वाले ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि जिंदगी बदल देने वाला पड़ाव है. पहली बार गांव तक बस पहुंचने की खबर से ही लोग उत्साहित हो उठे और पूरा इलाका जश्न के माहौल में डूब गया.
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दुल्हन की तरह हुआ बस का स्वागत
सड़क पूरी होते ही हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (HRTC) की बस का ट्रायल रन रखा गया. बस को शकेल्ड से तुम्मुन के लिए कारसोग के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट गौरव महाजन ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. गांव के लोग नेताओं और अधिकारियों का स्वागत करने पहुंचे और उनके साथ बस में बैठकर तुम्मुन से शकेल्ड और फिर वापस तुम्मुन तक का सफर तय किया. इस दौरान बस के गांव में दाखिल होते ही लोग सड़क किनारे जमा हो गए. गांव वालों ने किसी नई नवेली दुल्हन की तरह बस का स्वागत किया.
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ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग, ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन और सभी संबंधित विभागों का आभार जताते हुए मांग की कि यह बस सेवा सिर्फ कागजों पर दिखावटी न रह जाए, बल्कि नियमित रूप से चलाई जाए ताकि लोगों को स्थायी सुविधा मिल सके.