6 दिसंबर, 2025 को गोवा के ब्रिच बाय रोमियो लेन नाइट क्लब में आग लगने से 25 लोगों की मौत हो गई थी. इस मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई गई थी. जांच के बाद मजिस्ट्रियल रिपोर्ट सौंप दी गई है. रिपोर्ट में हादसे के पीछे जालसाजी, लाइसेंसिंग उल्लंघन और अवैध निर्माण को मुख्य वजह बताया है. इसमें पंचायत सेक्रेट्री रघुवीर बागकर की एक्शन लेने में नाकामी, क्लब का ऑपरेशन और लाइसेंस से जुड़ी खामियों का जिक्र किया गया है.
बिना लाइसेंस के चलता रहा
जांच में सामने आया है कि सेक्रेट्री बागकर ने ट्रेड लाइसेंस एक्सपायर होने के बावजूद भी नाइटक्लब चलने दिया. लाइसेंस एक्सपायर होने के बाद उसे तुरंत बंद कर दिया जाना चाहिए था, लेकिन वह बेरोकटोक चलता रहा. इससे लोगों की जिंदगी जोखिम में डाली गई. इसको लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई.
---विज्ञापन---
लाइसेंस में फर्जीवाड़ा
साथ ही जांच में यह भी सामने आया है कि एप्लाई करने के चार दिनों के भीतर जरूरी प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए ट्रेड लाइसेंस जारी कर दिया गया था. एप्लिकेशन के साथ दिए गए डॉक्युमेंट्स वैरिफाइड तक नहीं किए गए. सामान्य तौर पर ऐसे एप्लिकेशन की गहन जांच होती है. इस दौरान, डॉक्युमेंट्स वेरिफिकेशन, साइट इंस्पेक्शन और आवेदक की जांच की जाती है. हालांकि, इसके लाइसेंस में इस प्रक्रिया को दरकिनार किया गया.
---विज्ञापन---
दस्तावेजों में भी जालसाजी
रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रेंड लाइसेंस हासिल करने के लिए जमा किए गए दस्तावेजों में भी जालसाजी की गई थी. यह भी कहा गया है कि कागजी कार्रवाई में 'बार और नाइटक्लब का उल्लेख बाद में जोड़ा गया था.' इसके अलावा, जरूरी परमिट, लाइसेंस और एनओसी के बिना ही लूथरा ब्रदर्स को ट्रेड लाइसेंस जारी कर दिया गया.
आवेदन में दिए गए एक घर के नंबर के आधार पर नाइटक्लब के लिए जमीन के इस्तेमाल की मंजूरी दी गई थी. जांच की गई तो 'वह घर का नंबर अस्तित्व में ही नहीं है.'
'साल्ट पैन' लैंड पर अवैध निर्माण
कमेटी ने यह भी बताया कि क्लब और एक रिसॉर्ट के पास की दुकान और कमरे अवैध रूप से 'साल्ट पैन' लैंड पर बनाए गए थे. कोस्टल रेगुलेशन जोन के मानदंडों के उल्लंघन के बावजूद बागकर ने इन्हें बनाने की मंजूरी दी. ये उल्लंघन न केवल पर्यावरणीय कानूनों को तोड़ता है बल्कि आग या बाढ़ जैसी आपदाओं के खतरों को भी बढ़ाता है.
साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि ढहाने का नोटिस जारी होने और ट्रेड लाइसेंस खत्म होने के बाद भी कई महीनों तक पंचायत की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई. कमेटी ने सेक्रेट्री बागकर को बर्खास्त करने की सिफारिश की है.