भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सुप्रीम कोर्ट में दायर एक अर्जी में कहा कि पश्चिम बंगाल में उसके अधिकारियों और जमीनी स्तर के कर्मचारियों को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभ्यास करने में अपनी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी निभाते समय अपनी जान का डर सता रहा है. ईसीआई की अर्जी में कहा गया है कि फरक्का और चाकुलिया में गंभीर घटनाएं हुई हैं, जहां 1000 से अधिक लोगों की अनियंत्रित भीड़ ने बीएलओ ऑफिस की प्रॉपर्टी में तोड़फोड़ की.
अपने आदेश में, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि चुनावी लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत वोटर्स की सुनवाई पंचायत भवनों में की जाए. ऐसा इसलिए किया गया ताकि 1.36 करोड़ नागरिकों को निष्पक्ष सुनवाई मिल सके, जिनके नाम लॉजिकल गड़बड़ी वाली लिस्ट में थे और जिन्हें वोटर लिस्ट से बाहर किए जाने का खतरा था. कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार को चुनाव आयोग की मदद करने और इस प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने का भी निर्देश दिया था.
यह एप्लीकेशन और चुनाव आयोग के पहले के हलफनामे, जिसमें मुख्यमंत्री बनर्जी पर “भड़काऊ भाषण” देने का आरोप लगाया गया था, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई में अहम साबित होंगे.
वहीं, याचिका में कहा गया है कि फरक्का में माइक्रो-ऑब्जर्वर पर बेरहमी से हमला किया गया और दो माइक्रो-ऑब्जर्वर को गंभीर चोटें आईं. 28 जनवरी को दाखिल की गई चुनाव आयोग की अर्जी में कहा गया, ‘हैरानी की बात है कि मौके पर कोई पुलिस वाला मौजूद नहीं था, न ही कोई सुरक्षा कवर या प्रशासनिक मदद दी गई थी. माइक्रो ऑब्जर्वर को अपनी जान का डर सताने लगा और आखिरकार उन्हें अपनी ड्यूटी से हटने के लिए मजबूर होना पड़ा.’
आयोग ने कहा कि ये घटनाएं पश्चिम बंगाल की गंभीर जमीनी सच्चाई दिखाती हैं, जहां चुनाव आयोग के अधिकारियों और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को अपनी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी निभाते समय अपनी जान का डर सता रहा है.
ईसीआई ने कहा कि देश के बाकी हिस्सों में, SIR के नोटिस चरण के दौरान सुनवाई आमतौर पर उपखंडीय (Subdivisional) स्तर पर ही की जाती है और इसकी अध्यक्षता इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (EROs) करते हैं, जो सब-डिवीजनल ऑफिसर (SDO) या उसके बराबर के रैंक के ऑफिसर होते हैं, जो कानून के मुताबिक और पहले से तय प्रशासनिक अभ्यास के हिसाब से होता है. आयोग ने कोर्ट से सुनवाई को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की अनुमति देने का आग्रह किया.
उदाहरण देते हुए, चुनाव आयोग ने कहा कि एक ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर ने स्थानीय पुलिस को सूचित किया था कि 22 जनवरी को, कुछ उपद्रवी लोगों के एक समूह ने इटाहार हाई स्कूल में एक SIR सुनवाई स्थल पर धावा बोल दिया, परिसर में तोड़फोड़ की और आधिकारिक दस्तावेजों को नष्ट कर दिया.
फराक्का और चकुलिया से अधिक गंभीर घटनाओं की सूचना मिली, जहां कथित तौर पर 1,000 से अधिक लोगों की भीड़ ने ब्लॉक कार्यालय परिसर में तोड़फोड़ की. संशोधन अर्जी में कहा गया है कि फराक्का में, माइक्रो-ऑब्जर्वर पर ‘बर्बरतापूर्वक हमला किया गया’, जिसमें दो अधिकारियों को गंभीर चोटें आईं.
चुनाव आयोग ने आरोप लगाया कि घटनास्थल पर कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था और कोई सुरक्षा या प्रशासनिक सहायता प्रदान नहीं की गई थी. इसमें कहा गया है, ‘माइक्रो ऑब्जर्वर को अपनी जान का डर सता रहा था, और आखिरकार, उन्हें अपनी ड्यूटी से हटने के लिए मजबूर होना पड़ा.’
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