हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: CJP ProtestGyanesh KumarSIRBigg Boss 20

हाईकोर्ट के 5 बड़े फैसले, जो हर घर-परिवार, पति-पत्नी, उनके बच्चों और शारीरिक संबंधों से जुड़े

विज्ञापन
High Court Decisions

High Court Decisions Over Physical Relations, Married Life: याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केरल और दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले दिनों कई अहम फैसले सुनाए। केस इतने अनोखे थे कि हाईकोर्ट की पीठ द्वारा चौंकाने वाली टिप्पणियां भी की गईं। यह टिप्पणियां और फैसले हर घर-परिवार, पति-पत्नी के रिश्ते, बच्चों, शारीरिक संबंधों, शादीशुदा रिश्तों आदि कई मुद्दों से जुड़े हैं। ऐसे ही 5 फैसलों के बारे में हम आपको बता रहे हैं, जानिए और देखिए कहीं आपके घर में भी तो ऐसा नहीं हो रहा…

यह भी पढ़ें: महिला आरक्षण बिल: 27 साल में 8 बार रिजेक्ट, 9वीं दफा मोदी सरकार के हाथ प्रोजेक्ट, पास हुआ तो ऐसे बदलेगी तस्वीर

पोर्नोग्राफी से जुड़े केस में हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

पोर्नोग्राफी, सेक्स, वासना, पोर्न क्लिप देखने को लेकर केरल हाईकोर्ट में एक केस में जस्टिस पीवी कुन्हिकृष्णन ने फैसला सुनाया और विशेष टिप्पणी की। मामला अश्लील वीडियो देखने से जुड़ा था। एक शख्स सड़क किनारे बैठ कर अश्लील वीडियो देख रहा था। शख्स ने पुलिस को शिकायत दी। केस सीधे हाईकोर्ट में पहुंचा तो जज ने धारा 292 के तहत दर्ज किए गए केस को रद्द कर दिया। जज ने कहा कि आरोपों को सही मान भी लिया जाए तो भी अश्लील वीडियो, पोर्न क्लिप देखना अपराध नहीं है। ऐसा करना पुरुष या महिला का निजी फैसला है।

विज्ञापन

जज ने कहा कि सेक्स करने, पोर्न क्लिप देखने से उन्हें रोकना उनकी निजता का हनन होगा। सेक्स को लेकर जज ने कहा कि फिजिकल रिलेशन बनाना वासना नहीं होता। यह प्यार की अभिव्यक्ति है। पुरुष-महिला के शादीशुदा जीवन की धुरी है। इसे भगवान ने नर-नारी जीवन का हिस्सा बनाया है। बच्चे पैदा करने का जरिया बनाया है। इसी से भगवान की बनाई दुनिया आगे बढ़ रही है। जीवन चल रहा है। बालिग हो चुके पुरुषों और महिलाओं का एक दूसरे की सहमति से फिजिकल रिलेशन बनाना अपराध नहीं है।

यह भी पढ़ें: भारत का बड़ा एक्शन, कनाडा के उच्चायुक्त को 5 दिन में देश छोड़ने का दिया आदेश

विज्ञापन

जीवनसाथी का जानबूझकर शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना क्रूरता

दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत एवं न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने ऐतिहासिक फैसला दिया है। पीठ का कहना है कि अगर पति या पत्नी जानबूझकर शारीरिक संबंध नहीं बनाते। पति या पत्नी दोनों ही संबंध बनाने से इनकार कर दें या शादीशुदा लाइफ में सेक्स होता ही नहीं तो वह शादी नहीं, एक अभिशाप है, क्रूरता है।केस में अहम फैसला देते हुए कोर्ट ने एक दंपती के तलाक को बरकरार रखा है। दंपती की शादी को सिर्फ 35 दिन ही हुए कि तलाक हो गया।

हाईकोर्ट ने कहा कि दहेज प्रताड़ना की बात कहते हुए शारीरिक संबंध नहीं बनाना। प्रताड़ना के सबूत नहीं होने पर भी पुलिस को शिकायत देना भी क्रूर अपराध की श्रेणी में आता है। इसलिए हाईकोर्ट ने पत्नी की अपील को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि दंपती ने 2004 में हिंदू रीति-रिवाज से शादी की थी और कुछ समय बाद ही पत्नी अपने मायके चली गई। इसके बाद वह वापस लौट कर नहीं आई। पति को साथ पत्नी का इस तरह का व्यवहार क्रूरता है, इसलिए पति तलाक का हकदार है।

विज्ञापन

यह भी पढ़ें: पीएम मोदी के भाषण पर आनंद महिंद्रा का ट्वीट, बताया संसद के इतिहास का दिलचस्प सबक

पत्नी शारीरिक संबंध न बनाए तो पति के किसी और से फिजिकल रिलेशन गलत नहीं

दिल्ली उच्च न्यायालय की जस्टिस सुरेश कुमार कैत एवं जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की बेंच ने तलाक के एक मामले में बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने एक व्यक्ति के तलाक को इसलिए मंजूरी दे दी कि वह पिछले 18 साल से पत्नी की बजाय किसी और महिला के साथ रह रहा है। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि शादी के रिश्तों में शारीरिक संबंध एक महत्वपूर्ण आधार है। अगर पत्नी के साथ नहीं रहने के चलते आदमी के किसी गैर औरत के साथ ताल्लुक बन जाते हैं तो इसमें कुछ गलत नहीं है। इसे क्रूरता नहीं कहा जाना चाहिए।

विज्ञापन

कोर्ट ने पति का तलाक मंजूर करते हुए फैसले में टिप्पणी की है कि परिवार में बार-बार होने वाले झगड़ों के परिणामस्वरूप मानसिक पीड़ा होती है। लंबे समय के मतभेदों और आपराधिक शिकायतों की वजह से इस शख्स की मानसिक शांति छिन गई। दांपत्य सुख से वंचित होना पड़ा, जो किसी भी वैवाहिक रिश्ते का आधार माना जाता है। शारीरिक संबंध एक जिंदगी का एक महत्वपूर्ण भाग है। अब जबकि वह पिछले करीब दो दशक से पत्नी से अलग रह रहा है तो किसी अन्य महिला से संबंध बनाने को क्रूरता कहना उचित नहीं है।

यह भी पढ़ें: Hoysala Temples Listed As World Heritage: यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होयसल मंदिर, जानिए क्या है इसकी खासियत

विज्ञापन

पति दूसरी महिला के साथ रह सकता है, लेकिन…

दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत की अध्यक्षता वाली पीठ ने तलाक के एक मामले में अहम टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी से अलग होने के बाद किसी अन्य महिला के साथ पति रह सकता है। इसे क्रूरता नहीं माना जाएगा, लेकिन दोबारा मिलने की संभावना नहीं होनी चाहिए, तभी यह बात लागू होगी। पीठ ने महिला की याचिका खारिज कर दी और कहा कि लंबे अलगाव के बाद तलाक की कार्यवाही लंबित होने के दौरान किसी अन्य महिला के साथ रहना पत्नी द्वारा सिद्ध क्रूरता के कारण पति को तलाक से वंचित नहीं कर सकता है।

पीठ में शामिल न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने 13 सितंबर के एक आदेश में कहा कि इस तरह के लंबे समय तक मतभेदों और आपराधिक शिकायतों ने प्रतिवादी-पति के जीवन को कष्टकारी बना दिया। वह वैवाहिक रिश्ते से भी वंचित हो गया। अलगाव के इतने लंबे वर्षों के बाद पुनर्मिलन की कोई संभावना नहीं होने के बाद, प्रतिवादी पति को किसी अन्य महिला के साथ रहकर शांति और आराम मिल सकता है। उसे इस अधिकार से भी वंचित नहीं रखा जा सकता है। फैमिली कोर्ट ने भी सही निष्कर्ष निकाला कि पत्नी ने पति के साथ क्रूरता की।

विज्ञापन

यह भी पढ़ें: जज्बे को सलाम! सबसे कम उम्र की मेयर एक बार फिर सुर्खियों में, गोद में नन्ही परी को लेकर पहुंचीं ऑफिस

कमा रही महिला को मेंटेनेंस नहीं दिया जा सकता

एक महिला की मेंटेनेंस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने नौकरी कर रही, पैसा कमा रही महिला को भरण-पोषण देने से इनकार किया है। महिला ने अपनी याचिका में पति से कोर्ट खर्च के रूप में 55 हजार रुपये और रहने के लिए 35 हजार रुपये प्रति महीने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने महिला के पक्ष में मेंटेनेंस देने का आदेश पारित करने से इनकार करते हुए कहा कि वह महिला योग्य होने के साथ-साथ नौकरी भी कर रही है। ऐसे में पति द्वारा भरण-पोषण का मामला नहीं बनता है।

विज्ञापन

हाईकोर्ट ने कहा कि पुरुष (उसका पति) एक साधारण ग्रेजुएट है। महिला अपनी शादी के समय एम फिल थी। अब महिला कंप्यूटर फील्ड में PHD है और नौकरी भी कर रही है। ऐसे में वह मेंटेनेंस की हकदार नहीं है। पहले फैमिली कोर्ट ने पति से अलग हो चुकी महिला के भरण-पोषण की मांग करने वाली याचिका को अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद महिला ने दिल्ली हाईकोर्ट का रूख किया था। मामले की सुनवाई को बाद हाईकोर्ट ने महिला की फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola