देश के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान दिल्ली के कर्तव्य पथ पर बैठने की व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने जानबूझकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पहली पंक्ति के बजाय पीछे की सीटों पर बिठाया है. कांग्रेस नेताओं ने इसे न केवल प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताया बल्कि इसे लोकतंत्र और विपक्ष का अपमान करार दिया है. सोशल मीडिया पर कांग्रेस समर्थक और नेता इस भेदभाव को लेकर सरकार पर लगातार निशाना साध रहे हैं और इसे हीन भावना से ग्रस्त राजनीति कह रहे हैं.
पुराने दौर की तस्वीरों से दिया जवाब
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया पर पुरानी तस्वीरें साझा करते हुए सरकार को आईना दिखाने की कोशिश की है. उन्होंने याद दिलाया कि जब कांग्रेस सत्ता में थी तब बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, अरुण जेटली और सुषमा स्वराज को पहली पंक्ति में पूरे सम्मान के साथ जगह दी जाती थी. तिवारी ने तंज कसते हुए कहा कि आज भाजपा ने नेता प्रतिपक्ष को तीसरी पंक्ति में भेज दिया है और जनता यह सब देख रही है. कांग्रेस सांसदों का कहना है कि गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर शिष्टाचार और मर्यादा का पालन होना चाहिए था जो इस बार नहीं दिखा.
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विपक्ष का अपमान या प्रोटोकॉल की चूक
सांसद मणिकम टैगोर और विवेक तन्खा ने भी इस मुद्दे पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए इसे मोदी और शाह की सोची-समझी रणनीति बताया है. टैगोर ने सवाल किया कि आखिर अचानक प्रोटोकॉल में बदलाव क्यों किया गया और क्या सरकार विपक्ष के नेताओं की बेइज्जती करना चाहती है. विवेक तन्खा ने कहा कि सत्ता पक्ष की इन छोटी बातों से प्रजातंत्र आहत होता है और मौजूदा वातावरण में वे इससे बेहतर की उम्मीद भी नहीं करते. रणदीप सुरजेवाला ने भी इसे सरकार की कुंठा बताते हुए कहा कि राहुल गांधी के साथ किया गया यह व्यवहार किसी भी मापदंड पर स्वीकार्य नहीं है.
मर्यादा और परंपरा पर सवाल
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि मतभेद अपनी जगह हैं लेकिन राष्ट्रीय समारोहों में परंपराओं का पालन जरूरी है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने के साथ-साथ उनके पदों की गरिमा को भी कम करने की कोशिश कर रही है. यह विवाद अब सोशल मीडिया पर ‘सब याद रखा जाएगा’ जैसे नारों के साथ वायरल हो रहा है जिससे राजनीतिक गरमाहट बढ़ गई है. फिलहाल सरकार की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है लेकिन कांग्रेस ने इसे एक बड़ा मुद्दा बना दिया है.
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