डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैल रही फर्जी और भ्रामक खबरों पर लगाम लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में 'डिजिटल मीडिया नैतिकता कानून संशोधन अधिनियम, 2023' के नियम 3 को लेकर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान CJI सूर्य कांत ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैल रही फर्जी खबरें समाज के लिए एक गंभीर खतरा हैं और इन्हें नियंत्रित करने के लिए एक स्पष्ट कानून की आवश्यकता है. यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट में उस मामले की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें बॉम्बे हाई कोर्ट ने 'डिजिटल मीडिया नैतिकता कानून संशोधन अधिनियम, 2023' के नियम 3 को असंवैधानिक घोषित किया था. इस नियम के तहत केंद्र सरकार को फैक्ट चेक यूनिट (FCU) गठित करने की शक्ति दी गई थी, जो सरकार के कार्यों से जुड़ी "फेक, फॉल्स या मिसलीडिंग" जानकारी की पहचान कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से उसे हटवाने का आदेश दे सकती थी.

क्या था बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सितंबर 2024 में दिए गए फैसले में केंद्र सरकार को अपनी गतिविधियों से जुड़ी 'फर्जी खबरों' की जांच के लिए फैक्ट चेक यूनिट्स (FCU) गठित करने की शक्ति को असंवैधानिक करार देते हुए याचिकाकर्ता Kunal Kamra की इस दलील को सही माना था कि ऐसे कानून देश में व्यंग्य और हास्य को दबाने की कोशिश है.

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सुनवाई में CJI सूर्य कांत ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी खबरों के खतरे पर चिंता जताई और कहा कि फर्जी खबरों के उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा कि आर्मी और पुलिस जैसी संस्थाओं को भी इससे नुकसान पहुंच रहा है. उन्होंने इसपर एक कानून बनाने की जरूरत बताई. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार की ओर से कहा कि इसका मकसद हास्य या वैध आलोचना को दबाना नहीं है, बल्कि गलत सूचना से होने वाले नुकसान को रोकना है.

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तीन जजों की बेंच के समक्ष भेजा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन मामले को तीन जजों की बेंच के समक्ष भेज दिया. कोर्ट ने संबंधित पक्षों से 4 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है. CJI ने कहा कि यह मुद्दा "परमाउंट इंपॉर्टेंस" का है और सुप्रीम कोर्ट ही इस पर अंतिम कानूनी स्थिति स्पष्ट करेगा.